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वैकल्पिक व्यवस्था से आपूर्ति बहाल करने में प्रशासन रहा बैकफुट पर

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मऊ। कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से 36 घंटे तक लगातार आपूर्ति ठप रहने से जिला प्रशासन के द्वारा जनता को मुहैया कराए जाने वाली सुविधा का पोल खुल गया। व्यवस्था चुस्त दुुरुस्त रहें इसके लिए जिला प्रशासन ने 21 उपकेंद्रों पर लेखपालों की तैनाती की, ताकि वो आपूर्ति बहाल रखने में सहायक होगे। लेकिन जिला प्रशासन की यह कवायद पूरी तरह से फेल नजर आई।
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इसके अलावा नगर पालिका की लाइट बत्ती बिंग भी बिजली बहाली के लिए एक बार प्रयास तो की, लेकिन उसे भी सफलता नहीं मिली। हालात रहा कि 36 घंटा बीतते बीतते शहरवासियों के साथ जिले के अन्य हिस्सों में धुप अंधेरा छा गया। इस दौरान जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल और एसपी सुशील घुले को छोड़कर अन्य प्रशासिनक अधिकारी कर्मचारी आपूर्ति बहाली कराने के लिए उपकेंद्रों पर डटे दिखे।
बताते चले कि बिजली कर्मचारियों के सोमवार से कार्य बहिष्कार से बिजली आपूर्ति बहाल होने की संभावना थी। इसको देखते हुए चारों तहसीलों के एसडीएम के साथ अन्य कर्मचारियों को एलर्ट किया गया था। साथ ही बिजली आपूर्ति ठप न हो इसके लिए जिला प्रशासन की तरफ से व्यवस्था की गई थी। लेकिन बिजली कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद से सारी वैकल्पिक व्यवस्था फेल हो गई।
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लेखपालों का कुछ नही चला, दूसरी तरफ वैकल्पिक तौर से फाल्ट दुरुस्त कराने के लिए लगाए गए नगर पालिका और निकायों के बिजली प्रकोष्ठ के कर्मचारी भी आपूर्ति को बहाल करने में विफल रहें। सोमवार की देर शाम से देर रात तक सदर एसडीएम सदर निरंकार सिंह, एएसपी त्रिभुवननाथ त्रिपाठी, सिटी मजिस्ट्रेट जेएन सचान सहित अन्य अधिकारी आजमगढ़ मोड़ स्थित भीटी उपकेंद्र पर डटे रहे। लेकिन काफी प्रयास के बाद भी आपूर्ति बहाल नहीं हो सका।
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