मऊ। विधानसभा चुनाव में हेट स्पीच सहित आचार संहिता के उल्लंघन के तीन मामलों में आरोपी विधायक अब्बास अंसारी की बुधवार को कासगंज जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी हुई। प्रभारी सीजेएम ने दो मामलों में 4 जून व एक मामले में 5 जून को अगली सुनवाई होगी। इसमें दो मामले शहर कोतवाली और एक मामला दक्षिणटोला थाना क्षेत्र का है।
पहला मामला शहर कोतवाली क्षेत्र का है। मामले में अभियोजन के अनुसार एसआई गंगाराम बिंद की तहरीर पर शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज हुई। इसमें विधायक अब्बास अंसारी व अन्य को आरोपी बनाया गया। आरोप था कि 3 मार्च 22 को सदर सीट से सुभासपा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे अब्बास ने पहाड़पुर मैदान में जनसभा के दौरान कहा कि अगर सरकार आई तो अफसरों का ट्रांसफर नहीं होने दिया जाएगा। उन्हें हिसाब किताब के लिए रोका जाएगा।
पुलिस ने विवेचना में मामले में धारा 506, 171 एफ,186,189,153 ए, 120 बी के तहत सदर विधायक अब्बास अंसारी व उनके भाई उमर अंसारी, चुनाव एजेंट गाजीपुर के पुरानी कचहरी यूसुपुर मुहम्मदाबाद निवासी मंसूर अंसारी के विरुद्ध चार्जशीट कोर्ट में पेश किया गया है। मामले में उमर अंसारी कोर्ट में पेश नहीं हुए, उनकी ओर से गैरहाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र दिया गया। वहीं अब्बास की वीसी की जरिए पेशी हुई। प्रभारी सीजेएम ने मामले में साक्ष्य के लिए अगली तिथि 5 जून को तय की है। दूसरा मामला शहर कोतवाली क्षेत्र का है। मामले में अभियोजन के अनुसार एसआई राजेश कुमार वर्मा की तहरीर पर अपराध संख्या 95/22 धारा 188,171एफ के तहत केस दर्ज हुआ। आरोप है कि 27 फरवरी 22 को विधानसभा चुनाव के दौरान सुभासपा प्रत्याशी अब्बास अंसारी ने बिना अनुमति के राजाराम पुरा से लेकर भरहु का पूरा तक रोड शो निकाला। जिसमें 5-6 गाड़ियां तथा 100-150 लोगों की भीड़ एकत्र हो गई थी। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर बाद विवेचना अब्बास अंसारी, उमर अंसारी, गणेश दत्त मिश्रा, मंसूर अंसारी, मोहम्मद ईशा खान, शाहिद लारी, शाकिर लारी, जुल्फेकार और धर्मेंद्र सोनकर के विरुद्ध कोर्ट में चार्जशीट प्रेषित किया। तीसरा मामला दक्षिण टोला थाना क्षेत्र का है। तत्कालीन निरीक्षक पंकज कुमार सिंह की तहरीर पर 12 फरवरी 22 को आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी। मामले में पुलिस ने अब्बास अंसारी, उमर अंसारी, साकिब लारी,शाहिद लारी,इशराईल अंसारी और रमेश राम के विरुद्ध चार्जशीट कोर्ट में प्रेषित किया है। उच्च न्यायालय के आदेश पर सीजेएम ने धारा 188,171 भादवि के आरोप से मुक्त कर दिया है।