जिला सत्र न्यायालय बलिया से पेशी कराकर कानपुर लौटने के दौरान एक बंदी को उसके सहयोगियों ने सुरक्षा में साथ चल रहे सिपाहियों को असलहा सटा कर इंदारा रेलवे स्टेशन से छुड़ा लिया और फरार हो गए। बंदी के भागने की रिपोर्ट दर्ज कराने वाले सिपाहियों को थानाध्यक्ष जीआरपी ने प्रथम दृष्टया दोषी पाया और गिरफ्तार कर लिया।
बलिया जिले के फेफना थाना क्षेत्र के खलिलपुर गांव निवासी बबलू उर्फ मिथिलेश पुत्र हरदेव हत्या, अपहरण, मारपीट और बलवा की धारा में भभुआ से वर्ष 2005 में गिरफ्तार हुआ था। उसे कानपुर सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया गया। बबलू पर करीब 12 साल पहले रसड़ा कोतवाली क्षेत्र के कोटवारी मोड़ पर सभासद अनूप श्रीवास्तव की हत्या का आरोप है। बुधवार को मिथिलेश की बलिया जिले के सिविल कोर्ट में पेशी थी। कानपुर पुलिस लाइन से हेड कांस्टेबल पतरौल सिंह, कांस्टेबल जगवीर सिंह और कांस्टेबल विकास कुमार, लेकर बलिया आए थे। पेशी के बाद आरोपी को कानपुर वापस ले जाने के लिए तीनों सिपाही उत्सर्ग एक्सप्रेस में सवार हुए।
जीआरपी थाने में दर्ज रिपोर्ट में पतरौल सिंह ने पुलिस को बताया कि जिस समय वो आरोपी मिथिलेश सिंह को लेकर ट्रेन की बोगी में सवार हुए, कुछ और लोग भी बोगी में चढ़े। जैसे ही ट्रेन मऊ जिले के इंदारा रेलवे स्टेशन के आउटर पर पहुंची, बोगी में सवार मिथिलेश के सहयोगियों ने असलहा सटाकर उसे छुड़ाकर फरार हो गए। हेड कांस्टेबल पतरौल सिंह की तहरीर पर पुलिस ने जीआरपी मऊ थाने में रिपोर्ट दर्ज किया। साथ ही प्रथम दृष्टया तीनों सिपाहियों को दोषी पाते हुए गिरफ्तार कर लिया। सीजेएम प्रमोद कुमार सिंह ने सुनवाई के बाद हेड कांस्टेबल पतरौल सिंह, कांस्टेबल जगवीर सिंह और विकास को जेल भेजने का आदेश दिया। देर शाम फिर सुनवाई करते हुए सीजेएम ने उनकी जमानत मंजूर कर ली। लेकिन बेल बांड न भरे जाने के कारण जेल से गुरुवार को रिहा नहीं हो सके।