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Mau News: 75 साल की बीमार को मनरेगा मजदूर बताया

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राम भवती का फाइल फोटो
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मऊ। रतनपुरा ब्लॉक के अईलख के बाद अब कोपागंज ब्लॉक के चोरपा कला गांव में मनरेगा में धांधली उजागर हुई है। बीमार और चलने फिरने में असमर्थ 75 वर्षीय वृद्धा को कागजों पर न केवल मनरेगा मजदूर दिखाया गया, बल्कि खाते में 15 दिन की मजदूरी भी भेज दी। उधर मामले जानकारी होने पर वृद्धा के बेटे ने विरोध जताया तो उसे चुप रहने की धमकी दी गई। इसके बाद उसने मामले की शिकायत करते हुए डीएम को पत्रक सौंपा।
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डीएम प्रवीण मिश्र को दिए पत्रक में चोरपा कला निवासी संजय कुमार ने बताया कि मां रामभवती 73 वर्ष की हैं। शारीरिक रूप से चलने फिरने में असमर्थ हैं, उसे कम दिखाई देता है। उसके बाद भी ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी और रोजगार सेविका ने मिलीभगत कर बीमार और बुजुुर्ग मां को मनरेगा मजदूर दिखाकर जुलाई 2025 में 15 दिन मजदूरी खाते में 3555 रुपये भेज दी। उसे जानकारी कुछ दिन पहले हुई, जब उसने नेट पर जाकर इसकी जांच की तो उसके मां के नाम पर बने कई साल पुराने जॉब कार्ड का पता चला। इसकी जानकारी किसी को नहीं थी। संजय ने शासन से इसे निरस्त करने की मांग की। आरोप लगाया कि गांव में ऐसे कई लोगों मनरेगा मजदूर दिखाया गया है जो कि गांव में है ही नहीं। बीते कई महीने से मनरेगा मजदूर बताकर खाते में राशि भेजी जा रही है।
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दो और 23 जुलाई को जारी हुई है राशि
संजय कुमार ने डीएम को दिए पत्रक में साक्ष्य के साथ बताया कि बीमार मां को दो जुलाई को आठ दिन के कार्यदिवस के लिए 1896 रुपये खाते में भेजे गए हैं। जबकि 23 जुलाई को सात दिन के कार्यदिवस के लिए 1659 रुपये की मजदूरी भेजी गई है।
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दो महीने में दूसरा मामला उजागर
रतनपुरा ब्लॉक के अईलख गांव निवासी हरिशंकर सिंह ने गत दिनों मजदूरी भुगतान में अनियमितता की शिकायत को लेकर जिला प्रशासन से शिकायत की थी। इसके बाद भी गांव के गीतेश मौर्य को हाेमगार्ड होने के बाद भी मनरेगा में नाम शामिल किया गया। वहीं ग्राम प्रधान व सचिव ने होमगार्ड के नाम पर दो अलग-अलग वाउचर से मजदूरी का भुगतान किया। पहला बाउचर 20 दिसबंर से 13 जनवरी तक और सात फरवरी को 25 दिनों का 5925 रुपये का भुगतान किया। 14 जनवरी से 08 फरवरी तक 25 दिन की मजदूरी दिखाकर 10 फरवरी 10 को 5925 रुपये का भुगतान करा लिया। इस प्रकार 50 दिनों का बाउचर निकाला गया। इसके आधार पर प्रधान व सचिव ने लखनऊ में प्रशिक्षण ले रहे होमगार्ड को 11,850 रुपये मजदूरी का भुगतान किया था।
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बाहर रह रहे युवाओं को दिखाया गया था मजदूर
जिले में मनरेगा मजदूरों के नाम पर यह धांधली का पहला मामला नहीं है। इससे पहले अगस्त में रतनपुरा ब्लॉक के अईलख में उजागर हुआ था।यहां प्रधान ने दो सगे भाइयों, चाचा और गांव के बाहर रहने वाले का भी मनरेगा में भुगतान कराया था। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि गांव निवासी सुनील और कन्हैया कुशवाहा को मजदूर दिखाया गया है। मामले में सुनील से बात की तो उसने गांव में किसी भी तरह की मजदूरी से साफ इन्कार कर दिया है। वर्तमान में वह हैदराबाद में रह रहा है। इतना ही नहीं प्रधान ने मिली भगत करके अपने दोनों सगे भाई लाल बहादुर और संजय को भी मनरेगा में मजदूर बना दिया। प्रधान के चाचा शिव बच्चन को भी मनरेगा मजदूर बनाकर भुगतान कराया लिया।
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मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, लेकिन यह बेहद गंभीर मामला है। इसकी वो जांच कराएंगे।बताया कि जिले में वर्तमान में एक लाख 66 हजार से अधिक सक्रिय मनरेगा मजदूर है।
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राजीव कुमार
डीसी मनरेगा
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