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विद्यालयों का सत्र शून्य होने के कगार पर

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मऊ। जिले के पिछड़े इलाकों के सात उच्च प्राथमिक विद्यालयों को अपग्रेड कर राष्ट्रीय शिक्षा अभियान के तहत राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का दर्जा दिया गया। लेकिन अब तक कई राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सत्र शून्य होने के कगार पर है। अगस्त बीतने को है, अभी तक एडमिशन के लिए कई विद्यालयों में प्रभारी प्रधानाचार्य तथा शिक्षकों की तैनाती तक नहीं की जा सकी है। इससे ग्रामीण इलाकों के बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने की शासन की मंशा धरी की धरी रह गई।
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जिले के सात उच्च प्राथमिक विद्यालयों को अपग्रेड कर राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का दर्जा मिला है। स्कूलों पर नजर डाला जाए तो दोहरीघाट ब्लाक के बहरामपुर, बेला कसैला, घोसी के नदवल, रतनपुरा ब्लाक के गाढ़ा, जमदरा तथा देवदह सहित सात राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्थापित हैं। शासन के निर्देशानुसार जुलाई से सत्र शुरू होना था। लेकिन स्थिति यह है कि राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जूनियर हाईस्कूलों के भवन में संचालित हैं। अभी तक कई विद्यालयों पर प्रधानाचार्य तथा शिक्षकों की तैनाती ही नहीं की जा सकी है। दोहरीघाट ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारी की मानें तो बेला कसैला तथा बहरामपुर में जूनियर हाईस्कूल में अध्ययनरत छात्रों के लिए ही पर्याप्त कक्ष नहीं है तो नौवीं और दसवीं कक्षा के छात्रों के लिए कैसे व्यवस्था होगी। हालत यह है कि अभी तक एक भी एडमिशन नहीं हो पाया है। इसी तरह घोसी के नदवल स्थित जूनियर हाईस्कूल सत्र शून्य होने के कगार पर है। जबकि गाढ़ा स्थित जूनियर हाईस्कूल में अभी तक शिक्षक तथा प्रभारी प्रधानाचार्य की तैनाती के बारे में किसी को पता ही नहीं है। गाढ़ा स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक का कहना था कि अभी तक महकमे की ओर से कोई सूचना नहीं मिली है। बोर्ड में ट्रेजरी फीस जमा करने की अंतिम तिथि 20 अगस्त तक थी। जबकि अन्य अपग्रेड किए गए स्कूलों पर नाम मात्र छात्रों का ही एडमिशन किया जा सका है। कुल मिलाकर शासन की महत्वाकांक्षी योजना सिमट कर रह गया।
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