मऊ। फतेहपुर मंडाव ब्लाक क्षेत्र में स्थित दुबारी में दो विद्यालयों के प्रबंधकों द्वारा तीन लाख 30 हजार रुपयों की छात्रवृत्ति की रकम डकार ली गई। प्रकरण प्रकाश में आने पर डीएम ने बीएसए से जांच कराई। समाज कल्याण अधिकारी ने आरोपियों की चिह्नित करके एफआईआर दर्ज कराने के लिए पत्र लिखा है। मामला वर्ष 2010-11 का है।
ग्राम सभा दुबारी लक्ष्मीपुर के अंतर्गत संचालित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्रवृत्ति गबन की शिकायत पर जिलाधिकारी चंद्रकंात पांडेय ने जांच कराने का निर्देश 22 अक्टूबर को बीएसए राकेश कुमार को दिया। बीएसए ने तीन खंड शिक्षाधिकारियों से प्रकरण की जांच कराई। खंड शिक्षाधिकारियों ने जांच की तो पता चला कि ग्राम सभा में 14 प्राथमिक विद्यालय और 9 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं।जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले चार हजार आठ सौ अट्ठावन छात्रों में से तीन हजार नौ सौ पच्चास छात्रों को छात्रवृत्ति वितरित की गई जबकि 908 छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं दी गई। इसी प्र्रकार उच्च प्राथमिक विद्यालयो के 1403 छात्रों के 1283 को वजीफा दिया गया, 120 छात्रों को वजीफा नहीं दिया गया। जांच समिति ने पाया कि इनमें से श्री दुर्गाजी जनता शिक्षण संस्थान कालीचौरा दुबारी और श्री दुर्गा जी शिक्षण संस्थान पूर्व माध्यमिक विद्यालय काली चौरा दुबारी अस्तित्व में ही नहीं है। लेकिन इनके नाम पर छात्रवृत्ति लेकर हड़प ली गई है। मजे की बात है कि इस रकम की छात्रवृत्ति वितरित करने का उपभोग प्रमाण पत्र भी जमा कर दिया गया था। इस प्रकार प्राइमरी के 908 छात्रों की 300 रुपयों की दर से दो लाख 72 हजार चार सौ रुपये और उच्च प्राथमिक विद्यालय के 120 छात्रों की 480 रुपयों की दर से 57 हजार छह सौ रुपये वितरित न कर हड़प लिया गया। दोनों विद्यालयों के कर्ताधर्ताओं ने कुल तीन लाख तीस हजार रुपये डकार लिया। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट 17 नवंबर को दी, बीएसए ने 26 नवंबर 2014 को डीएम को रिपोर्ट दी। इस प्रकरण के दोषियों को चिह्नित करके उनके विरुद्ध प्रभावी करने के लिए डीएम ने दो दिसंबर 2014 को जिला समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश दिया। जिला समाज कल्याण अधिकारी विजय प्रताप यादव का कहना है कि छात्रवृत्ति घपले के इस प्रकरण में प्रथम दृष्टया प्रबंधक , संकुल प्रभारी और खंड शिक्षाधिकारी परोक्ष-अपरोक्ष रूप से शामिल हैं। सरकारी धन के दुरुपयोग के इस प्रकरण में खंड शिक्षा अधिकारी, संकुल प्रभारी और प्रबंधक भी भूमिका अहम है। इन सबके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। यदि इसमें समाज कल्याण विभाग के भी किसी कर्मचारी की भूमिका पाई जाएगी तो उसके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।