मऊ। एक वर्ष पूर्व जिस तामझाम के साथ तमसा का सफाई अभियान चला, वह वक्त के साथ धीमा पड़ता चला गया। हाल यह है कि तमसा की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है।
नालों से शहर का कचरा और गंदा पानी नदी में जाने से अभियान का असर नहीं दिख रहा है। नदी का पानी लगातार प्रदूषित होते जा रहा है। गर्मियों के दिनों में जलस्तर कम होने से प्रदूषण बढ़ गया है। तमसा को स्वच्छ बनाने के लिए नगरपालिका की तरफ से एक करोड़ की योजना का लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। डीएम के आदेश के बावजूद नालों पर जालियां नहीं लगाई गई हैं।
एक तरफ जहां गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए करोड़ाें के प्रोजेक्ट चल रहे हैं, वहीं मऊ में तमसा नदी प्रदूषित होती चली जा रही है। पिछले वर्ष प्रशासन के साथ मिलकर यहां के लोगों ने तमसा को स्वच्छ बनाने का अभियान चलाया। इस अभियान में जिले के सभी बुद्धिजीवियों के साथ-साथ बच्चे, शिक्षक और नगर पालिका के कर्मचारियों ने काफी महती भूमिका निभाई। स्वयं जिलाधिकारी कुमुदलता श्रीवास्तव ने अभियान की अगुवाई की थी। जिलाधिकारी ने नगर पालिका को नदी मेें गिरने वाले नालों में जाली लगाने की बात कही थी, लेकिन आदेश पर अमल नहीं किया गया। वर्तमान में हालत यह है कि सभी नालों से कचरा और गंदा पानी नदी में जा रहा है। जिससे तमसा प्रदूषित होती जा रही है। इसे बचाने के लिए यदि फिर से प्रयास नहीं हुए तो न सिर्फ एक साल पूर्व चलाया गया अभियान व्यर्थ चला जाएगा बल्कि नदी का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा।