जिले में पिछले तीन साल में पौधरोपण अभियान में करीब 93 लाख पौधे लगाए गए। कागजों में तो हरियाली के दावे हैं पर बृहस्पतिवार को टीम ने पड़ताल की तो करीब दस प्रतिशत पौधे ही जीवित मिले। कई जगह मौके पर पौधे नहीं मिले, बंजर जमीन मिली। लापरवाही
पौधरोपण के बाद जियो टैगिंग और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कई बार बैठकें भी हो चुकी हैं। इसके बावजूद अधिकांश पौधे या तो सूख गए या नष्ट हो गए। वहीं निजी संगठनों द्वारा लगाए गए पौधे आज बड़े होकर वृक्ष का रूप ले चुके हैं।
1713 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले मऊ जिले में वर्ष 2023, 2024 और 2025 के बीच 93 लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया था। इसके बाद अब वन विभाग 30 लाख से अधिक पौधे लगाने की नई योजना पर कार्य कर रहा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में सभी विभागों द्वारा 31.53 लाख पौधे लगाए गए थे, जबकि 2024 में 31.52 लाख पौधे लगाए गए। वर्ष 2025 में 30 लाख 50 हजार 807 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
इसके तहत विभिन्न विभागों को अलग-अलग लक्ष्य दिए गए पर्यावरण विभाग को 13,98,200, ग्राम्य विकास विभाग को 11,06,000, नगर विकास विभाग को 16,000, कृषि विभाग को 1,81,000 और उद्यान विभाग को 1,13,000 पौधे सहित अन्य विभागों को भी पौधरोपण का लक्ष्य सौंपा गया था।
पर्यावरण दिवस के अवसर पर जब संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने नगर के तीन स्थानों पर जाकर पौधरोपण की स्थिति की पड़ताल की तो कई जगह पौधे नहीं मिले, और जहां मिले भी वहां अधिकतर पौधे सूखे हुए पाए गए।
टीम सबसे पहले मुंशीपुरा स्थित पशु अस्पताल परिसर पहुंची, जहां 150 से अधिक पौधों में से 20 से कम पौधे ही सुरक्षित मिले। इसके बाद जिला पंचायत कार्यालय के सामने जज कॉलोनी के पास खाली मैदान में 400 से अधिक लगाए गए पौधों में से लगभग 50 पौधे सुरक्षित पाए गए।
बंधा मोड़ क्षेत्र में तीन वर्षों में लगाए गए पौधे या तो गायब मिले या ट्रीगार्ड में लगे कुछ पौधे ही सुरक्षित दिखाई दिए। पौधरोपण को लेकर तत्कालीन जिलाधिकारी प्रवीण मिश्रा की अध्यक्षता में गंगा समिति की बैठक में निगरानी के निर्देश दिए गए थे।
नगर पालिका और अन्य निकायों द्वारा विशेष प्रयास किए जाने का दावा भी किया गया था, वहीं वन विभाग द्वारा नियमित मॉनिटरिंग की बात कही गई थी।