फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीन सालों में 11957 ग्रामीणों को मिली छत

विज्ञापन
विज्ञापन
मऊ। प्रधानमंत्री आवासीय योजना के तहत तीन वर्षो में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 11957 लोगो को ही छत मुहैया हो सकी है। नगरीय क्षेत्र के गरीबों को आवास मुहैया कराने में जिम्मेदार विभाग फिसड्डी रहा। नगर पालिका सहित दस नगर पंचायतों में महज 2102 गरीबों को ही आवास मिल सका है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 1800 तथा नगरीय क्षेत्रों में 8507 गरीब आवास पाने की आस में हैं।
विज्ञापन

जिले के सभी नौ ब्लाकों के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2016-17 में 6508 आवास, 2017-18 में 4249 तथा 2018-19 में 2966 आवास स्वीकृत किए गए। जबकि नगरीय क्षेत्रों में 8809 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इस प्रकार जिले में ग्रामीण क्षेत्रो में पिछले तीन सालों में 13733 आवास स्वीकृत किए गए। नगरीय क्षेत्रों में वर्तमान वित्तीय वर्ष में 8809 आवास स्वीकृत किए गए । इनमें से 2102 आवास पूर्ण हो गए हैं। इस प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों के 15 हजार 59 और नगरीय क्षेत्रों के 2102 गरीबों को अब तक छत नसीब हो चुकी है। इन्हें तीनों किस्तें जारी हो चुकी हैं। इनके लिए 168 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। जबकि बाकी बचे आवासों के 8507 गरीबों के लिए अभी 102 करोड़ आठ लाख 40 हजार रुपयों की और जरूरत है। हालांकि यह धन विभाग को उपलब्ध कराया जा चुका है। लेकिन इन्हें लाभार्थियों को अभी तक सुलभ नहीं कराया जा सका है।
योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक लाभार्थी को एक लाख 20 हजार रुपये दिए जाते हैं। पहली किस्त 40 हजार , दूसरी 70 और तीसरी किस्त दस हजार रुपये देने का प्रावधान है। जबकि नगरीय क्षेत्रों में ढाई लाख रुपये तीन किस्तों क्रमश: 50 हजार, ड़ेढ़ लाख और 50 हजार रुपये दिए जाते हैं। सरकार सभी गरीबों को आवास सुलभ कराने का वादा भले करती हो लेकिन सरकार ने एक गाइड लाइन तय कर दी है कि गांव की जनसंख्या के दो प्रतिशत से अधिक लोगों को प्रधानमंत्री आवास नहीं दिए जा सकते हैं। यह गाइड लाइन भी सभी गरीबों को आवास मिल पाने में आड़े आती है।
विज्ञापन


कोट
बेस लाइन सर्वे 2011 के अनुसार पात्र गरीबों को आवास दिए जाते हैं। उपलब्ध धन को गाइड लाइन के अनुसार दिया गया है। मार्च तक अधूरे आवासों को पूर्ण कर दिया जाएगा। आशुतोष कुमार दिवेदी, मुख्य विकास अधिकारी

बेस लाइन सर्वे 2011 के अनुसार हुई सामाजिक आर्थिक एवं जातिगत गणना की सूची के अनुसार उन गरीबों को आवास का पात्र माना गया है , जिनके पास आवास नहीं है। यानी मिट्टी की दीवार पर टिन शेड या छप्पर वाले घर वाले ही योजना के पात्र हैं। लेकिन इन्हें पात्र तभी माना जाएगा जब उनके नाम बसे लासइन सर्वे 2011 की सूची में शामिल होगा। कुछ होशियार लोगों ने अपने नाम इस सूची में डलवा लिया और बहत सारे गरीब इस सूची में स्थान नहीं पा सके। सूची बनाने में सफाई कर्मियों तक को लगाया गया था। ग्राम प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष कहते हैं कि इस सूची में कई विसंगितयां रह गई हैं।

रानीपुर ब्लाक के बस्ती गांव निवासी मुकेश राम पुत्र स्व. दीपचंद का कहना है कि उसका नाम वर्ष 2015-16 में आवास के लिए चयनित किया गया। उसके नाम से रुपये भेजने की रिपोर्ट भी दे दी गई । लेकिनखाते में रुपये नहीं आए। परदहा ब्लाक के नसोपुर गांव के मलिकार राम पुत्र स्व. मतिराम के पास कोई आवास ही नहीं है। कई बार डीएम से सीडीओ तक गुहार लगाई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। फतेहपुर मंडाव ब्लाक के नकिहवा के जयराम और कोपागंज ब्लाक के देवकली बिसुनपुर गांव निवासी राजेंद्र यादव और कोपा कोहना निवासी सूरज यादव के नाम भी सूची में हैं। लेकिन आवास नहीं मिला।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें