मऊ। जनपद की 23 लाख की आबादी में 60 प्रतिशत गरीबों की नब्ज उन लोगों के हाथ में है, जो चिकित्सा की क ख ग तक नहीं जानते। पिछले कुछ सालों में इन डाक्टरों के इलाज के साथ कई मरीजों ने अपनी जाने तक गंवा दी। जिले में बड़ी संख्या में अप्रशिक्षित डाक्टरों द्वारा प्रैक्टिस की जानकारी होने के बाद भी विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं की जा रही है।
जिले में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर एक जिला अस्पताल, महिला जिला अस्पताल, नौ सीएचसी और 38 पीएचसी केंद्र तो बनाए गए है। लेकिन संसाधनों और डाक्टरों के अभाव के चलते गरीबों को मुफ्त में इलाज देने का दावा हवाई साबित हो रहा। ऐसे में मरीज मजबूरी में अप्रशिक्षित चिकित्सकों के यहां इलाज करा रहे। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जनपद में केवल 31 अस्पताल और 75 ऐसे चिकित्सक हैं, जिनके पास डिग्री है। जबकि केवल मऊ नगर में ही 100 से ज्यादा अस्पताल संचालित हो रहे है।
वहीं सदर तहसील, मधुबन, मुहम्मदाबाद गोहना और घोसी तहसीलों में इनकी संख्या एक हजार तक है। विभागीय सूत्रों की माने तो हर साल अप्रशिक्षित डाक्टरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और स्वास्थ्य विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ जनवरी 2018 से 11 अक्तूबर 2018 तक केवल भीटी स्थित दो अस्पतालों में कार्रवाई की गई। इस बावत सीएमओ डा. सतीशचंद्र सिंह का कहना है कि अप्रशिक्षित डाक्टरों पर समय समय पर जांच कर कार्रवाई की जाती है।
घटना के बाद भी नहीं चेता विभाग
मऊ। 27 सितंबर 2018 को मधुबन के दरगाह स्थित जमीन सारंगपुर में एक अप्रशिक्षित डाक्टर द्वारा गलत इंजेक्शन लगाए जाने के जमीन सांरगपुर निवासी प्रीती 16 पुत्री राजेश की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने डाक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कोतवाली में तहरीर दिया। जहां पुलिस के आने के पहले से आरोपी डाक्टर फरार हो चुका था। इसी तरह से कोपागंज के भातकोल स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में अप्रशिक्षित डाक्टर द्वारा असुरक्षित प्रसव कराने के चलते जज्जा बच्चा दोनों की मौत हो गई थी।