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जिन्होंने आजादी में नाखून तक नहीं गंवाए वो शक की निगाह से देख रहे

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मऊ। नगर के शाही कटरा के मैदान में शुक्रवार की रात भारत की स्वाधीनता में मुसलमानों की भूमिका विषय पर एक जनसभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरंभ सर्वप्रथम क़ारी मुहम्मद इस्माइल ने तलावत ए कलाम पाक से किया और ताबिश रेहान ने राष्ट्रीय गीत एवं महमूद आजम ने नात ए पाक और सलमान जमीरी ने नजम पढ़ी। क़ारी मसीउर्रहमान मिफ्ताही अध्यक्ष जमीअत ए उलमा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
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मुख्य अतिथि मौलाना अब्दुल्लाह नासिर अध्यक्ष जमीअत ए उलमा बनारस ने जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद ने आजादी के मौके पर कौम को खेताब करते हुए दिल्ली में कहा था कि मैं अपनी कौम की तारीख कहां से शुरू करूं मेरी कौम की तो उस जंजीर जैसी है कि एक हिस्से को छेड़ू तो पूरी जंजीर हिलने लगती है। मौलाना आजाद ने जंग ए आजादी में बेमिसाल कुर्बानियां पेश की हैं। उन्होंने 15 अगस्त को आजादी के हवाले से तिरंगा क्यों लहराया जाता है उस पर भी विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि आज वो लोग हमें शक की निगाह से देखते हैं जिन्होंने कभी आजादी की लड़ाई में अपने नाखून तक की शहादत पेश नहीं किया।
कहा कि हमें शक की निगाह से एक सरकार देख रही है तभी तो सिर्फ मदारिस ए अर्बिया में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम की विडियो ग्राफी कराने के लिए शासनादेश जारी किया गया। कहा कि हमें इस बात का जरा भी अफसोस नहीं है कि मदारिस ए अर्बिया में विडियोग्राफी करायी गई बल्कि इसी के साथ अन्य शिक्षण संस्थाओं के लिए भी विडियोग्राफी का आदेश दिया गया होता। वैसे तो हम आजादी के बाद से लेकर आज तक अपने घरों एवं मदरसों में धूमधाम के साथ ध्वजारोहण एवं जश्न ए आजादी मनाते रहे हैं। उन्होंने नई पीढ़ी से अपने पूर्वजों के स्वर्णिम इतिहास के बारे में जानकारी के लिए जोर दिया। राज्यसभा के पूर्व बसपा सांसद सालिम अंसारी ने कहा कि अफसोस इस बात का है कि भारत की आजादी में मुसलमानों के इतिहास को तोड़मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। सरकारें हमारी इस कुर्बानी को नजर अंदाज करके सच्चाई से मुंह मोड़ रही हैं। देश भक्ति का सारा पाठ हमने पढ़ा है और आज हम को ही ग़ददार के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इस दौर में हमें बड़ी होशियारी के साथ रहना है। मुफ्ती अनवर अली ने कहा की सत्ताधारी लोग मुसलमानों को शक की निगाह से देख रहे हैं इस लिए इस सरकार ने मदरसों में आजादी के कार्यक्रम से संबंधित विडियोग्राफी कराने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि 1856 में सबसे पहले सेराजुददौलाह ने अंग्रेजों का मुक़बला किया दुर्भाग्य से वह जंग हार गया। उसके बाद शेर मैसूर टीपू सुलतान ने बड़ी बहादुरी के साथ अंग्रेजों का मुकाबला किया परन्तु अपने कुछ ग़ददार हो गये जिस के कारण वह शहीद हो गये।
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जिला अध्यक्ष मौलाना खुर्शीद अहमद मिफ्ताही ने कहा कि मौलाना सय्यद अरशद मदनी की बड़े दिनों से इच्छा थी कि जंग ए आजादी के विषय पर जलसा किया जाय और आज उनका सपना पूरा हुआ है। उन्होंने जंग ए आजादी में मुसलमानों की भागेदारी पर विस्तार पूर्वक चर्चा कीा। इस जनसभा को मुहम्मद तैयब पालकी, अलताफ अंसारी, खालिद अंसारी, अब्बास अंसारी, मुफ्ती मंसूर नोमानी, मौलाना ओबैदुल्लाह मिफ्ताही, मौलाना मुहम्मद फारूक़ मजहरी, अब्दुस्सलाम शामियाना, मुनव्वर अब्दुल गफूर आदि ने संबोधित किया।
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वीरेंद्र चौहान
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