फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसी बड़े हादसे के इंतजार में है जिला महिला अस्पताल

विज्ञापन
विज्ञापन
जिला महिला अस्पताल के अत्यंत जर्जर हो चुके भवन को सात साल पहले इंजीनियरों ने खतरनाक घोषित कर दिया था। लेकिन खतरा मोल लेकर अब तक इस भवन में अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में है। जिलाधिकारी के अस्पताल को एक अगस्त को नए भवन में शिफ्ट करने का आदेश भी बेअसर साबित हो रहा।
विज्ञापन

जिलाधिकारी के निर्देश पर जुलाई माह में सीडीओ की अध्यक्षता में पीडब्ल्यूडी, विद्युत और आरईएस के अधिशासी अभियंता और सीएमओ सहित अफसरों की टीम ने पुराने जर्जर भवन का निरीक्षण के दौरान इसे बेहद खतरनाक माना था। टीम की रिपोर्ट पर ही डीएम ने एक अगस्त को ही बगल में नये बने चार मंजिले भवन में इसे शिफ्ट करने का निर्देश दिया था लेकिन 27 दिन बाद भी डीएम के निर्देश का पालन नहीं किया गया। ऐसे में अभी कर्मचारी और मरीज दोनों ही दहशत में हैं।
29 नवंबर 2011 को बसपा शासन में संयुक्त जिला अस्पताल से अलग कर पुराने अस्पताल के परित्यक्त भवन में जिला महिला अस्पताल को शिफ्ट किया गया था। तत्कालीन सीएमओ डा. एमपी सिंह की पहल पर अस्पताल भवन की जांच पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन से कराई गई थी। उन्होंने इस भवन खतरनाक बताकर ध्वस्त कराने की सलाह दी। लेकिन इसे गिराया नहीं गया और तभी से इसी जर्जर भवन में अस्पताल का संचालन हो रहा है। बाद में सपा शासन काल में अस्पताल निर्माण के लिए 20 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। उसी परिसर में चार मंजिला नया भवन बनकर तैयार है। अस्पताल प्रशासन की बेरुखी से डाक्टरों और कर्मचारियों में नाराजगी है। इनका कहना है कि यदि कोई हादसा होता है तो इसकी सारी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होगी।
विज्ञापन

इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी आ ैर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से जवाब तलब किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें