मधुबन। तहसील क्षेत्र के गुरूम्हा गांव में दबंगों से अपनी भूमिधरी को कब्जा मुक्त कराने की मांग को लेकर एक परिवार की दो महिलाएं अपने चार बच्चों को लेकर तहसील प्रांगण में गुरुवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आमरण अनशन पर बैठ गई।इसके पहले भी पीड़ितों ने तहसील दिवस से लेकर अन्य दिवसों पर भी उच्चाधिकारियों से मिलकर अवैध रूप से किए गए कब्जे को मुक्त कराने के लिए नापी की मांग करते हुए अरसे से न्याय की गुहार लगाती आ रही हैं।लेकिन न्याय न मिलते देख गुरूवार की दोपहर पीड़ित महिलाएं बच्चों सहित तहसील परिसर में आमरण अनशन पर बैठ गई। अनशनकारी महिलाओं ने चेताया कि जब तक न्याय नहीं मिलेगी अनशन जारी रहेगा।सुनवाई नही होने पर 24 जनवरी को आत्मदाह के बाध्य होना पड़ेगा।
महिला का कहना है कि क्षेत्र के गुरूम्हा गांव में मौजूद उसकी जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया हैं। मामले को लेकर संतदेव की पत्नी सरोज ने उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई थी। लेकिन दबंगों के उपर बेदखली की कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उसने तहसील में ही आमरण अनशन करके उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया। तहसीलदार अपने लेखपाल और अर्दली को लेकर मौके पर भी गए। लेकिन बिना नापी किए तहसीलदार वापस आ गए। जिसमें सरोज देवी ने तहसीलदार के अर्दली और लेखपाल पर पैसा मांगने का आरोप भी लगाया है। इसके बाद सरोज देवी ने मुख्यमंत्री को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाया था, और सुनवाई नही होने पर 18 जनवरी से आमरण अनशन की चेतावनी दी थी। जिसके तहत न्याय न मिलने से क्षुब्ध सरोज देवी, रेनू सिंह ने अपने बच्चों में कु. तनु (10), आयूष सिंह (03), आर्यन (12), कु.रीतिका (10) के साथ गुरूवार की दोपहर ठंड के बीच तहसील परिसर में आमरण अनशन पर बैठ गई।देर शाम तक कोई भी अधिकारी ने अनशन कारियो से संपर्क नही किया था।