जिले में चाइनीज मंझा हादसों का सबब बन रहा है। लेकिन व्यापक पैमाने पर प्रशासन तथा सामाजिक स्तर से जागरुकता कार्यक्रम न चलने से किशोर तथा युवा नुकसान की बारीकियों से अनभिज्ञ हैं। इस संबंध में किशोर, युवाओं तथा बुजुर्गो तथा अधिकारियों से बातचीत की गई सभी ने जागरुक होने से समस्या का समाधान होने पर जोर दिया।
एक दूसरे की पतंग काटने की होड़ में युवा तथा किशोर चाइनीज मंझा ज्यादा तरजीह देते हैं। लेकिन जानलेवा होने की बात से बिल्कुल बेपरवाह दिखे। ताजोपुर गांव के किशोर रितेश मिश्रा का कहना था कि पतंग उड़ाना अच्छा लगता है। चाइनीज मंझा जानलेवा है लेकिन जानकारी नहीं है।यदि ऐसी बात है तो चाइनीज मंझा की जगह सामान्य धागे से बना पतंग ही खरीदकर उड़ाना पंसद करेंगे। साथ ही स्कूल में भी सहपाठियों को जागरुक करेंगे। इसी क्रम में ताजोपुर के ही राहुल कुमार राजभर का कहना है कि पतंग उड़ाना बहुत अच्छा लगता है। लेकिन चाइनीज मंझा से हादसा होने की बात सुना हूं। यदि ऐसी बात है तो कालेज के सहपाठियों के साथ गांव में भी चाइनीज मंझा इस्तेमाल न करने के लिए युवाओं तथा बच्चों को जागरुक करूंगा। बुजुर्ग अरविंद मूर्ति का कहना था कि जिला प्रशासन, स्कूल, कालेज तथा सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से जागरुकता कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को जागरुक करने की जरूरत है। चाइनीज मंझा न खरीदने के लिए अपने स्तर से अभियान चलाऊंगा। डुमरांव के बुजुर्ग ज्ञान प्रकाश मिश्र का कहना है कि चाइनीज मंझा से हादसे होने की जानकारी मिलती रहती है। युवाओं तथा बच्चों को चाइनीज मंझा न खरीदने के लिए प्रेरित करेंगे। वहीं अपर पुलिस अधीक्षक शिवाजी शुक्ला का कहना है कि चाइनीज मंझा से होने वाले हादसों के मद्देनजर कैंप के माध्यम से दुकानदारों के साथ युवाओं तथा बच्चों को जागरुक किया जाएगा।