देवलमुनि के तपोभूमि देवलास पर देवर्षि देवल जनकल्याण समिति के तत्वावधान में चल रहे रामकथा के छठे दिन काशी से पधारे जगदीश चंद्र शांडिल्य ने राम वन गमन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राम के साथ पूरी अयोध्या के नर-नारी जंगल में राम के साथ रहने का फैसला लिया क्योंकि सबका राम से इतना सभी का प्रेम था। उन्होंने कहा कि सभी वृक्षों का अपना-अपना एक-एक फल होता है। परंतु एक वृक्ष में फल नहीं लगता है। फिर भी उसकी छाया में बैठने वालों की जैसी जिसकी इच्छा होती है। वैसा-वैसा फल सबको प्राप्त होता है। वह वृक्ष कौन है तो वह राम हैं। गाजीपुर से आए अखिलेश उपाध्याय ने कहा कि पूरे ब्रह्मांड को बनाने वाला बाहर कीे सुंदरता को नहीं वह तो अंदर की सुंदरता को देखता है। इसलिए शबरी को भामिनी शब्द से संबोधित किया, क्योंकि शबरी अंदर से सुंदर थी और गुरु वाणी पर विश्वास निश्चल मन से रखती थी। इस अवसर पर श्यामसुंदर पांडेय, राममूरत यादव, प्रेमचंद्र चौबे, रुद्रप्रताप सिंह, जनार्दन यादव, विजयशंकर पांडेय, रामजी चौरसिया, अनुराग यादव, रजनीकांत, नंदन गुप्ता, रविंद्र कन्नौजिया, सुनील मोदनवाल, नीरज दुबे, लक्ष्मी गुप्ता, सोनू, राजेश, अभिषेक, सुदामा यादव आदि उपस्थित रहे।