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दो अध्यक्ष पूरा नहीं कर सके थे अपना कार्यकाल

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मुहम्मदाबाद गोहना। नगर पंचायत जिले की सबसे पुरानी नगर निकायों में शुमार है। पहली बार यहां वर्ष 1936 में आम निकाय चुनाव कराया गया था। तबसे लेकर अभी तक अभी तक के निकाय चुनाव में दो अवसर ऐसा भी आया है कि जनता द्वारा चुने गए दो अध्यक्ष अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके और उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा। इसमें से एक अध्यक्ष ने इस्तीफा दिया तो तो दूसरे को सदस्यों द्वारा लाये गए अविश्वास प्रस्ताव के चलते पद से हटना पड़ा।
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मुहम्मदाबाद गोहना नगर निकाय के लिए 12 वें आम चुनाव की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। इस निकाय के इतिहास पर नजर डाला जाये तो अभी तक 81 सालों के इतिहास में कुल 11 बार आम जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों में से दो अध्यक्षों को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद से हटना पड़ा था। इसमें सबसे पहले साल 1971 में अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित स्वर्गीय राजाराम गुप्ता के खिलाफ सदस्यों द्वारा भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था। इस आरोप से खिन्न श्री गुप्ता ने स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया। बाद में वह अपना इस्तीफा वापस लेना चाहते थे लेकिन सदस्यों के प्रबल विरोध के चलते मामला माननीय उच्च न्यायालय तक भी गया लेकिन स्वर्गीय गुप्ता को वहां से भी राहत नही मिल सका और अंत मे उन्हें पदच्युत होना पड़ा। इसी प्रकार साल 1988 में के आम निकाय चुनाव में निर्वाचित हुए विंध्याचल सोनकर भी अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नही कर सके। अध्यक्ष बनने के दो साल बाद 1990 में तत्कालीन नगर सदस्यों द्वारा लाये गए अविश्वास प्रस्ताव का वह सामना नहीं कर सके। अविश्वास प्रस्ताव पास होने के बाद मात्र दो साल बाद ही उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा। अब जबकि साल 1998 में नगर निकाय नियमावलियों में संशोधन कर सदस्यों को अविश्वास मत लाने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है। इसके चलते प्रदेश की निकायों में अध्यक्ष पदों पदच्युत होने की प्रक्रिया पर लगभग विराम लग चुका है।
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