मऊ। आपसी समन्वय, सहिष्णुता और एक दूसरे के लिये शुभेच्छा ही हमारे बुजुर्गों की धरोहर रही है जो आज भी हमारी सभ्यता, संस्कृति एवं परंपरा का हिस्सा है। इसकी रक्षा करने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है। यह बातें पूर्व पालिका अध्यक्ष अरशद जमाल ने मीडिया के साथ एक अनौपचारिक वार्ता में कहा। कहा कि अल्पसंख्यकों के जज्बात, उनके बलिदान एवं अधिकारों तथा समाज के सृजन में उनके योगदान तथा हिस्सेदारी का भी ख्याल रखा जाए। कहा कि बहुसंख्यक समुदाय अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा-सुरक्षा, उनकी भावनाओं की कद्र करने तथा सभी को साथ लेकर चलने के प्रति जिम्मेदारी का निर्वहन करे। उन्होंने कहा कि हमारे शहर में सबसे बड़ी संख्या अंसारी बिरादरी की है और शहर के व्यापार प्रणाली भी लगभग पूरी तरह अंसारी बिरादरी के हाथों में है। इस लिए शहर में सहिष्णुता और समन्वय को बेहतर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी भी इसी बिरादरी पर है। शहर में कुरैशी, सब्जी विक्रेता, खान, सिद्दीकी, इराकी, चूड़ी व्यापारी, नाई, इदरीसी, मंसूरी, धोबी, कंदी आदि कई समुदाय हैं जिनकी संख्या अंसारी समुदाय से कम है। इसी तरह, कुछ इलाके हैं जहां अंसारी दूसरे समुदाय से कम संख्या में हैं, वहां अंसारी अल्पसंख्यक हैं।
अरशद जमाल ने कहा कि मऊ एक व्यावसायिक शहर है और जिला बनने के बाद आस-पास के अन्य शहरों, गांवों और कस्बों से एक बड़ी संख्या में लोग व्यवसाय या रोजगार करने के लिए यहां आकर बसे हैं। हम उनके हितों की अनदेखी नहीं कर सकते।