दोहरीघाट / दुबारी। घाघरा नदी का जल स्तर जैैसे-जैसे घट रहा है वैसे-वैसे नदी के कहर बरपाने की चिंता सताने लगी है। नदी खतरे के निशान से 33 सेमी ऊपर बह रही है। तटवर्ती इलाकों की हजारों एकड़ फसल पानी में डूबे रहने से किसानों को नुकसान की चिंता सताने लगी है। दूर से नुकसान हो रही फसल को लोग निहार रहे हैं। मधुबन के देवारा में धान, गन्ना, बाजरा आदि की फसल पानी में डूब जाने से नष्ट हो गई है। घाघरा नदी के जलस्तर में घटाव होने से प्रशासन जहां राहत की सांस ले रहा है। वहीं तटवर्ती इलाके के लोगों को नदी के कटान करने का भय सताने लगा है। कटानपीड़ितों की मानें तो नदी का जलस्तर जैसे-जैसे घटता है। नदी उतनी ही तेजी से कटान करती है। नदी के घटते बढ़ते रहने से लोगों को नदी रौद्र रुप धारण करने की चिंता खाए जा रही है। भारतमाता मंदिर की दीवार पर नदी की लहरें टक्कर मार रही है। नदी के रुख से नगर की एतिहासिक धरोहरें मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, खाकी बाबा कुटी, लोक निर्माण विभाग,हनुमान मंदिर आदि पर खतरा मंडराने लगा है। तटवर्ती इलाके के गांवों की हजारो एकड़ फसले अभी भी पानी में डूबी हुई है। 24 घंटे मे घाघरा का जल स्तर में 12 सेमी का घटाव दर्ज किया गया। मंगलवार को नदी का जल स्तर 70.23 मीटर रहा। सोमवार को 70.35 मीटर रहा। गौरीशंकर घाट पर नदी का जलस्तर खतरे का निशान 69.90मीटर है। दोहरीघाट कस्बा के तीन मुहल्लों दलित बस्ती, मल्लाह टोला, भगवानपुरा में बाढ़ के पानी के साथ आई गंदगी को साफ नहीं कराया जा सका है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से लोग मच्छरजनित बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। मधुबन के देवारा में घाघरा जलस्तर घटने से बाढग्रस्त क्षेत्र के सभी पुरवो को राहत मिली है। जल जमाव होने के चलते उठ रही दुर्गंध से लोगों को एक-एक पल बिताना मुश्किल हो रहा है। वहीं पानी में डूबी धान, गन्ना, बाजरा की फसल नष्ट होने से चारे का संकट बढ़ गया है।