मऊ। जिला महिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। जर्जर भवन में चल रहा अस्पताल बरसात में कभी भी जमींदोज हो सकता है। इसे पीडब्ल्यूडी ने खतरनाक घोषित कर रखा है। कहने को ही केवल यह जिला महिला अस्पताल है। यहां आने वाली महिला मरीजों को दवा भी अस्पतालों से नहीं मिल पाती। प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को बाजार से दवा खरीदनी पड़ती है। यहां दोपहर दो बजे के बाद अगली सुबह आठ बजे तक इमरर्जेंसी में कोई महिला अथवा प़ुरुष चिकित्सक है ही नहीं। इस अवधि में आने वाले मरीजों को नर्सों को ही देखना, भर्ती करना और उनका ट्रीटमेेंट करना होता है। आए दिन यहां मरीजों के तीमारदार दवा, साफ चादर और पंखे आदि जरूरी सुविधाओं के लिए नर्सों से लड़ते रहते हैं।
29 जनवरी 2011 को 30 बेड का महिला अस्पताल आनन फानन दशकों से परित्यक्त बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया। तब से यह इसी जर्जर भवन में चल रहा है। नियुक्ति तो इस अस्पताल में सीएमएस डॉ. माधुरी सिंह, डॉ. रीमा यादव सहित आठ चिकित्सकों की है। मगर इनमें पांच पुरुष डाक्टर हैं। इनमें दो तो एनेस्थीसिया के हैं। जबकि यहां पर कभी आपरेशन नहीं होता। तीन अन्य पुरुष चिकित्सक आयुष के हैं। एक चीफ सहित चार फार्मासिस्ट भी यहां तैनात हैं। मरीजों के तीमारदारों की शिकायत है कि यहां पर महीनों से दवाओं का घोर अभाव है। जब भी कोई महिला मरीज यहां आती है तो उससे बाजार की दवाइयां मंगवाई जाती हैं। बाजार की दवा लिखने की मनाही के कारण चिकित्सक स्वयं दवाइयां न लिखकर नर्सों को परची पर दवा लिख देने का दबाव बनाते हैं।