मऊ। वित्तीय वर्ष बीतने में अब केवल एक दिन शेष है, लेकिन जिले के सरकारी विभाग शनिवार को शासन से अवमुक्त बजट की राशि शत प्रतिशत खर्च नहीं कर सके हैं। हालात यह है कि जिले के 42 विभागों में कुछ विभागों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर विभाग केवल 50 प्रतिशत तक अपना बजट खर्च कर सके हैं। ऐसे में 31 मार्च तक खर्च न होने के बाद जारी बजट लैप्स हो जाएगा। 21 विभाग तो कुछ भी खर्च नहीं कर सके।
जिला योजना समिति से वित्तीय वर्ष 2018-19 में जिले में 42 विभागों को अलग अलग विकास कार्यों के लिए दो अरब 68 करोड़ 58 लाख रुपये जारी किया गया था। जिसमें विभागों द्वारा एक अरब 36 करोड़ 88 लाख 69 हजार रुपये खर्च किया गया। यहां ध्यान देने वाली बात है कि 42 विभागों में 24 विभागों द्वारा जारी राशि को पूरा वित्तीय वर्ष बीतने के बाद भी खर्च नहीं किया गया है। जिला योजना की मासिक प्रगति प्रतिवेदन के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2018-19 वित्तीय वर्ष में सबसे ज्यादा राशि 82 करोड़ 60 लाख 57 हजार रुपया रोजगार कार्यक्रम मनरेगा विभाग को आवंटित दिया था। जिसमें विभाग ने 51 करोड़ 85 लाख 64 हजार राशि खर्च की थी। इसके बाद ग्रामीण आवास को अवमुक्त राशि 52 करोड़ 63 लाख 20 हजार रुपये में विभाग ने 29 करोड़ 21 लाख 30 हजार रुपये खर्च किया।
इसी तरह लघु सीमांत विभाग ने कृषकों को लिए जारी राशि 4 करोड़ 67 लाख राशि में 49 लाख 34 हजार राशि खर्च किया। वहीं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी 4 करोड़ 42 लाख 18 हजार में 8 लाख रुपये की राशि खर्च की जा सकी है। ऐसे में विभागों द्वारा वित्तीय वर्ष के लिए जारी दो अरब 68 करोड़ 38 लाख में अब तक केवल एक अरब 36 करोड़ 88 लाख राशि खर्च की गई है। शेष राशि वित्तीय वर्ष बीतने से पहले खर्च कर पाना असंभव सा है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में 80 करोड़ 29 लाख 17 हजार रुपये 42 विभागों में दिया गया था। लेकिन जनवरी 2019 तक विभागों द्वारा इसके सापेक्ष केवल 30 करोड़ 3 लाख 2 हजार रुपये ही खर्च हो सका है। इसमें सबसे ज्यादा खर्च मनरेगा विभाग 16 करोड़ 98 लाख 56 हजार रुपये खर्च किया गया। वित्तीय वर्ष 2018-19 में 43 विभागों में 24 विभाग फिसड्डी साबित हुए। हालांकि इसमें उद्यान, खेलकूद, पुष्टाहार विभाग को वित्तीय वर्ष में बजट ही आवंटित नहीं हुआ था। लेकिन 21 विभाग बजट मिलने के बाद भी राशि खर्च नहीं कर सके। जिसमें भूमि विकास एवं जल संसाधन को एक करोड़ 4 लाख आवंटित राशि, सामुदायिक विकास को 1 करोड़ 42 लाख, निजी लघु सिंचाई को 15 लाख, राजकीय लघु सिंचाई को एक करोड़ 55 लाख, विज्ञान एंव प्रौद्योगिकी को 10 लाख, पर्यटन को 5 करोड़, सड़क व पुल पर अवमुक्त 16 करोड़ 31 लाख 92 हजार राशि साल बीतने के बाद भी खर्च नहीं कर सके।