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अज्ञानी से ज्ञानी बनाने का कार्य करते हैं गुरु

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आर्य समाज मऊनाथभंजन के वार्षिकोत्सव के में बुधवार को हवन पूजन किया गया। यजमान परमात्मा पांडे एवं उनकी धर्मपत्नी सुधा पांडे रही। यज्ञ ब्रह्मा विश्वव्रत शास्त्री रहे।
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शुभारंभ सत्यवीर आर्य के भजनों से हुआ, दिन में दयानंद विद्यालय के बच्चों के बीच में विद्वानों का व्याख्यान हुआ। पंडित विश्वव्रत शास्त्री ने बच्चों को उनकी दिनचर्या, आचरण, सामाजिकता, राष्ट्रीयता, आदि विषयों पर चर्चा की। बच्चों से प्रश्नोत्तरी के द्वारा धर्म एवं सत्य की जानकारी दी गई। रामचंद्र शास्त्री ने कहा कि मनुष्य का जन्म नहीं होता, वह बनाया जाता है अर्थात मनुष्य कर्म के अनुसार अपना कार्य विवेक पूर्वक करता है तो वह मनुष्य है, जो भलाई, सत्यता, सौम्यता, दयालुता, उदारता आदि गुणों को धारण करता है। वह मनुष्य होता है। उन्होंने वेद, शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि जो अपने जीवन को सदाचरण युक्त बनाता है, जिसके कर्मो से किसी भी जीव जंतु, पशु पक्षी आदि को कोई परेशानी न हो वह मनुष्य है। आचार्य विश्वव्रत ने कहा कि जो हर बुराइयों से बचे हुए हैं वे ही बच्चे होते हैं, बालक के जीवन में तीन गुरु होते हैं माता, पिता और गुरु। माता जन्म देकर पालन करती है, पिता जीवन में आगे बढ़ने की शिक्षा देते हैं, गुरु अज्ञानी से ज्ञानी बनाने का कार्य करते हैं।
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