दीपावली और छठ पर्व को देखते हुए आरपीएफ और जीआरपी की ओर से संयुक्त रूप से रेलवे स्टेशन पर मॉकड्रिल कर सुरक्षाबलों ने संयुक्त अभ्यास किया। अचानक जवानों को दौड़ते भागते देख यात्री हैरत में रह गए। लेकिन जब पता चला कि यह सुरक्षा को लेकर मॉकड्रिल है तो उन्होंने राहत की सांस ली।
मंगलवार की सुबह करीब 11 बजे मऊ रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक पर सब कुछ सामान्य चल रहा था। इसी दौरान किसी यात्री ने ओवरब्रिज के पास एक लावारिस पड़े पिठ्ठू बैग को देखा और उसे संदिग्ध मानते हुए जीआरपी को सूचना दी। कुछ ही देर में जीआरपी, आरपीएफ के जवानों ने संबंधित जगह से यात्रियों को दूर हटाते हुए जगह को एक विशेष तरह की पट्टी से ब्लाक कर दिया। कुछ देर बाद आरपीएफ वाराणसी के क्राइम ब्रांच अनिरुद्ध राय और आरपी पाठक और आपीएफ प्रभारी डीके राय, जीआरपी एसओ राघवेंद्र मिश्रा निरोधक दस्ता के पहुंचे और लावारिस बैग को खोला, हांलाकि उसमें कुछ नहीं मिला। इस दौरान यात्रियों में कौतूूहल बना रहा। कुछ देर बाद पता चला कि यह आरपीएफ-जीआरपी द्वारा सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने के लिए मॉकड्रिल किया गया है। आरपीएफ प्रभारी डीके राय ने यात्रियों को बताया कि किसी विपरीत पस्थितियों से निपटने के लिए समय समय पर मॉकड्रिल किया जाता है।
मॉकड्रिल के बाद आरपीएफ-जीआरपी ने प्लेटफार्म एक और दो पर टीसी के साथ चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान 20 से ज्यादा लोगों को पकड़ा। इस दौरान एक युवक आरपीएफ कर्मचारियों को पहुंच की धौंस जताते हुए उन पर कार्रवाई की धमकी देता रहा। उधर पकड़े लोगों से रेलवे ने जुर्माना वसूल कर छोड़ा। अचानक चेकिंग अभियान से बिना टिकट के यात्रियों में हड़कंप की स्थिति बन गई। जहां कई पकड़े जाने के डर से इधर उधर भागते दिखे।