मऊ। जिले में 32 आंबेडकर स्कूलों के 74 अध्यापकों की नियुक्तियों की कथित अनियमितता के मामले की जांच में नया मोड़ आ गया है। उप निदेशक समाज कल्याण ने इन अध्यापकों की नियुक्तियां करने से पूर्व अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की जांच शुरु कर दी है। डीडीआर ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को पत्र लिखकर सभी अध्यापकों की नियुक्तियों के लिए प्रकाशित कराए गए विज्ञापनों का विवरण तलब किया है। डीडीआर के इस नये आदेश से स्कूल प्रबंधकों और नवनियुक्त अध्यापकों में हड़कंप मचा है।
बता दें कि जिले के 32 आंबेडकर स्कूलों में 74 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति वर्ष 2016 में अलग अलग महीनों में की गई थी। लेकिन आरटीई की बाध्यता से बचने के लिए इनकी नियुक्ति वर्ष 2011 से पूर्व की तिथियों में दर्शाई गई। इस आशय की शिकायत एक सेवानिवृत्त अधिकारी की ओर से मुख्यमंत्री से की गई। लेकिन इसके बावजूद इन अध्यापकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन कराए बगैर इन्हें वेतन और पिछली तिथियों के वेतन भी एरियर के रूप में दे दिए गए। जांच में कई अध्यापकों के टीईटी के प्रमाण पत्र नेट पर शो नहीं करते पाए गए हैं। कई के स्नातक और बीएड प्रमाण पत्र भी संदिग्ध पाए गए। जांच समिति ने इन अध्यापकों के प्रमाण पत्रों को परीक्षा नियामक इलाहाबाद और संबंधित विश्वविद्यालयों को पत्र भेजने की सलाह दिया।
इस बीच सोमवार को डीडीआर सुनील सिंह सेंगर ने सभी अध्यापकों की नियुक्तियों के मामले में रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने के लिए सक्षम अधिकारी का आदेश और प्रकाशित कराए गए विज्ञापनों की कापी मांगा है। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार, यदि निष्पक्षता पूर्वक जांच हो जाए तो विभाग के कई लोग कार्रवाई की जद में आएंगे। क्योंकि अलग अलग समय में मऊ में तैनात रहे जिला समाज कल्याण अधिकारियों के हस्ताक्षर भी कार्यालय के ही कुछ लोगों ने किए हैं।
जांच में पारदर्शिता के लिए विज्ञापनों के विवरण मांगे गए हैं। -सुनील सिंह, उप निदेशक समाज कल्याण