रानीपुर। गणतंत्र दिवस के अवसर पर कांसगंज में हुई घटना से जिले की पुलिस ने सबक नहीं सिखा, परिणाम स्वरूप बिना परमीशन के ही बुधवार की शाम रविदास जयंती के अवसर पर गोकुलपुरा गांव से जुलूस निकाला गया था। इसके चलते पुरानी रंजिश की चिंगारी, जुलूस में महिलाओं के डीजे पर डांस करने के दौरान हुई धक्का मुक्की के चलते आग का रुप धारण की। परिणाम स्वरूप गांव पहुंचते-पहुंचते दोनों पक्ष एक दूसरे पर हमलावर हुए। इस दौरान दो की जान गई। दो मौत से सिहरी पुलिस अब अपनी कमी को छुपाने में जुटी है। बताते चले रविदास जयंती के अवसर पर गोकुलपुरा गांव से निकाले गए जुलूस के लिए कोई परमीशन नहीं था, नाही पुलिस ने गांव के लोगों को इसके लिए ताकीद किया। इसका परिणाम है कि जुलूस के साथ सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं था। जुलूस में शामिल गांव के लोगों के साथ राकेश और देवंती और उनके परिवार के सदस्य मौजूद थे। इस दौरान जब जुलूस सादीपुर गांव के पास पहुंचा, तो महिलाएं डीजे पर डांस करने लगी। इस दौरान कुछ पुुरुष भी नाचने के लिए उतर पड़े। यहां राकेश का देवंती के घरवालों के बीच विवाद हुआ। यहां दोनों पक्ष एक दूसरे को धक्का मुक्की देने तक सीमित रह गए। लेकिन दोनों ने एक दूसरे को देखने की धमकी दिया था। यदि यहां पुलिस की सुरक्षा रही होती तो शायद बड़ा हादसा नहीं होता। जैसे ही जुलूस गांव के मुहाने पर वापस पहुंचा, दोनों के परिवार के लोग एक दूसरे पर टूट पड़े। परिणाम स्वरूप दोनों पक्ष ने एक दूसरे पर लाठी डंडा और ईंट पत्थर से हमला कर दिया। इसमें राकेश के साथ देवंती घायल हुई। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। जहां दोनों की मौत हो गई। बताते चले घटना के बाबत पूछे जाने पर सीओ मुहम्मदाबाद अनिल कुमार थानाध्यक्ष रानीपुर की भाषा बोले। बोले कि घटना जुलूस में नहीं हुई, बल्कि जुलूस के समाप्त होने पर हुई। बोले परंपरागत जुलूस के लिए कोई अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। जबकि नियम है कि लाउडस्पीकर बजाने से लेकर जुलूस निकालने तक के लिए परमीशन की आवश्यकता होगी।