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Mau News: पंजीकृत 65, चल हो रहे 90 से ज्यादा जांच केंद्र, विभाग को शिकायत का इंतजार

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मऊ। जनपद में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मात्र 65 जांच केंद्र ही पंजीकृत हैं जो सोनाग्राफी के साथ अल्ट्रासाउंड करते हैं। लेकिन जिलेभर में 90 से ज्यादा जांच केंद्र बिना पंजीकरण के चल रहे हैं। ऐसे केंद्रों को बंद करने के खिलाफ विभाग की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। हालही में प्रशासन की टीम को एक अस्पताल में बिना चिकित्सक की मौजूदगी में ही गर्भवती महिलाओं की जांच होती मिली थी। यह पहला मामला नहीं है, जिले में कई चिकित्सकों का संरक्षण पाकर ऐसे जांच केंद्र चल रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कहीं से भी शिकायत मिलने के बाद जांच कर कार्रवाई होती है।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ाें के अनुसार में पंजीकृत केंद्रों में शहरी क्षेत्र में 36 और ग्रामीण क्षेत्र में 29 जांच केंद्र चल रहे हैं। इन सभी सेंटर का संचालन करने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक की आवश्यकता होती है। लेकिन ऐसे सेंटर पर अप्रशिक्षित भी जांच कर रहे हैं। जनपद के अनेक प्रमुख बाजारों में ऐसे सेंटर ज्यादा संचालित हो रहे हैं। विभाग की कहना है कि एक रेडियोलॉजिस्ट एक जनपद में ही दो सेंटर को संचालित कर सकता है। लेकिन यहां आसपास के जनपद के चिकित्सक भी अस्पताल की तरह जांच सेंटर की भी शाखा खोल रहे हैं।
2022 में सील हुए थे तीन केंद्र
जनपद में मेडिकल माफिया का सिडिंकेट किस तरह काम करता है, इस बात का प्रमाण है कि जिले में अस्पताल से लेकर डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच मात्र शिकायतों पर होती है। जिले में लंबे अंतराल के बाद साल 2022 में तत्कालीन सीएमओ डॉ. नरेश अग्रवाल से चिरैयाकोट और मुहम्मदाबाद गोहना में तीन सेंटर का अवैध रूप से संचालन पाया था। पूछताछ के दौरान सभी सेंटराें पर मौजूद कर्मी पंजीकरण से लेकर चिकित्सक की मौजूदगी के संबंध में कोई जवाब नहीं दे पाए थे, जिसके बाद तीनाें को सील कर दिया गया था। कुछ दिनों बाद जांच में तीनाें को हरी झंडी दे दी गई। हाल ही में दिल्ली की घटना के बाद बेसमेंट में संचालित अस्पताल, संस्थान केे जांच के दौरान शहर में एक अस्पताल में टेक्नीशियन गर्भवती महिलाओं की जांच कर रहा था। प्रशासन की पूछताछ मेंं स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल में मौजूद कर्मी पूछताछ में कोई जवाब नहीं दे सके थे।
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कार्रवाई होते ही खुल जाता है दूसरा सेंटर

विभाग की मिलीभगत से चलने वाले इन सेंटर पर शासन या किसी रसूखदार की शिकायत पर जांच की जाती है। उसके पहले ही सेंटर पर ताला बंद हो जाता है और दूसरा सेंटर खोल दिया जाता है।
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