फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिसे सत्संग प्रिय नहीं परमात्मा उसको प्रिय नहीं

विज्ञापन
विज्ञापन
दोहरीघाट। स्थानीय कस्बा के मद्धेशिया वैश्य धर्मशाला में चल रही रामकथा मेें अयोध्या धाम से पधारे अवधेश जी महाराज ने कहा कि
विज्ञापन

जिसे सत्संग प्रिय नहीं परमात्मा उसको प्रिय नहीं। जो संत से रिश्ता नहीं रखता परमात्मा उससे कदापि रिश्ता नहीं रखता। सतसंग तो कहीं मिल सकती है। कथा हर जगह नहीं मिल सकती। जिसके जीवन में कथा बैठ गई उसके जीवन में क्रांति आ गई।
विज्ञापन

कहा कि एक दिन बहुत से राजा आए और पूछने लगे कि कौन सा पराक्रम प्रकट करने पर राजकुमारी सीता की प्राप्ति हो सकती है तब जनक जी ने कहा मेरी सीता ने जिस धनुष को सहजता पूर्वक उठाकर किनारे रख दिया था यदि उसे कोई तोड़ दे तो मै अपनी पुत्री सीता का विवाह उसके साथ कर दूंगा। लेकिन उस धनुष को उठाना तो दूर रहा हिला भी न सके इसलिए अभी तक मैंने किसी को अपनी पुत्री के योग्य नहीं समझा। राजा जनक जी ने विश्वामित्र से कहा कि मुनिवर अब यह चाहता हूं कि भगवान राम इस धनुष की प्रत्यंचा चढ़ा दे तो मैं अपनी कन्या सीता को इनके हाथ में दे दूं। राजा जनक की आवाज सुनकर विश्वामित्र ने कहा कि राजन आपसे राम को अपना वह धनुष दिखाइए तो सही। मुनि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर धनुष को भगवान श्री राम ने सहजता से उठाते ही धनुष खंडित हो गया। इस अवसर पर सीताराम पटवा, गुलाब चंद, गोरखनाथ, दीपेंद्र मद्धेशिया आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें