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जीएसटी लागू होने के छह माह बाद भी उपभोक्ताओं को नहीं मिली राहत

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मऊ। वस्तु एवं सेवाकर लागू होने के करीब छह माह बाद भी उद्यमियों एवं व्यापारी वर्ग उबर नहीं सक ा है। रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया सरल न होने से इनको परेशानी झेलनी पड़ रही रहा है। जिससे सामानों पर दाम कम करने का लाभ उपभोक्ताओं को मिलता नजर नहीं आ रहा है।ऐसे में कंपनियां मोटा मुनाफा कमा रही हैं। इस मुद्दे पर उद्यमियों, व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं से बातचीत की गई, तो सभी ने बड़ी कंपनियों के उत्पादों पर अधिकतम प्रिंट मूल्य अंकित करने पर सरकार की तरफ से पारदर्शी निगरानी तंत्र को प्रभावी बनाए जाने पर जोर दिया।
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केंद्र सरकार की तरफ से पूर्व में दैनिक उपभोग की 200 से ज्यादा वस्तुओं से टैक्स कम किया था। अब एक बार फिर 29 वस्तुओं और 54 सेवाएं सस्ती कर कारोबारियों, व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं को राहत देने का दावा किया जा रहा है। 25 जनवरी से यह बदलाव लागू होगा। आम उपभोक्ताओं की मानें तो सरकार की तरफ से पूर्व में 200 वस्तुओं पर टैक्स कम करने के बाद भी लोगों का इसका लाभ नहीं मिला है। उपभोक्ताओं को बाजार में पुराने दर पर ही समान मिल रहा है। उपभोक्ताओं की मानें तो कंपनियों के उत्पाद पर अधिकतम खुदरा मूल्य वास्तविक दर से अधिक प्रिंट रहता है। इससे कंपनियां मोटा मुनाफा वसूल रही हैं। इस संबंध में लघु उद्योग भारती के महामंत्री बालकृष्ण ठरड का कहना है कि उत्पाद का दाम तो घटा दिया गया है, लेकिन सरकार की तरफ से रिटर्न प्रक्रिया सरल न होने से उद्यमियों, व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। 29 वस्तुओं और 54 सेवाएं सस्ती होने से आम लोगों को आंशिक फायदा होगा। उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिला महामंत्री गोपाल कृष्ण बरनवाल का कहना है कि सरकार की तरफ से जीएसटी में दी गई रियायत का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। बड़ी कंपनियों के प्रोडक्ट्स पर मनमाने ढंग से प्रिंट खुदरा मूल्य का मानिटरिंग करने के लिए पारदर्शी निगरानी तंत्र को चुस्त दुरुस्त बनाया जाए। बड़ी कंपनियों पर नकेल लगने से ही आम लोगों को राहत मिलना संभव है। वैसे सरकार के कदम से बाजार में तेजी आएगी। उप्र उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष उमाशंकर ओमर का कहना है कि जनपद में व्यापारियों से जीएसटी के साथ मंडी शुल्क वसूले जाने से सामान महंगी हो जा रही है। रिटर्न प्रक्रिया को सरल किया जाए। 29 वस्तुओं और 54 सेवाएं सस्ती होने से आम लोगों को नाम मात्र ही फायदा मिलेगा। खरीदारी करने आए ग्राहक मनोज यादव, जयप्रकाश शर्मा का कहना है कि बाजार में रोजमर्रा के सामानों के तमाम कंपनियों के प्रोडक्ट्स पर अधिकतम खुदरा मूल्य काफी ज्यादा प्रिंट रहता है। ऐसे में सरकार की तरफ से बड़ी कंपनियों के मनमाने रवैये पर शिकंजा कसते हुए प्रोडक्ट्स पर वास्तविक मूल्य ही प्रिंट करने के लिए सिस्टम विकसित किया जाए।
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