लोहिया आवासों के आवंटन में की गई मनमानी का खुलासा अब जांच में अब उजागर होने लगा है। इस दौरान अनुसूचित जाति के लिए लाभार्थियों को चयनित करने के बाद यहां तक कि उन्हें पहली किश्त के चेक निर्गत करने के बाद भी मनमानी करके लाभार्थी बदल दिए गए। अनुसूचित जाति के पात्रों को आवंटित आवास ओबीसी के लोगों को दे दिए गए। मामला रानीपुर ब्लाक के अलीनगर और उमती गांवों के हैं। इस प्रकरण की हुई जांच में भारी अनियमितता पाए जाने पर सीडीओ ने रानीपुर बीडीओ को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।
मुख्य विकास अधिकारी द्वारा दी गई नोटिस के अनुसार वित्तीय वर्ष 2015-16 में रानीपुर ब्लाक के अलीनगर ग्राम पंचायत के पिछड़ी जाति के राजेश पुत्र लालता , अनुसूचित जाति के बच्चेलाल पत्र राजदेव ,राम रतन पुत्र रामजीत को लेेहिया आवास आवंटित किया गया था। जांच में पाया गया कि बीडीओ ने 26 मई 2016 को अपने पत्र संख्या 196 के द्वारा यह सूचना दी कि कुछ लाभार्थियों के नाम छूट गए हैं , इसके बाद इन लाभार्थियों के स्थान पर पिछड़ी जाति के सुभावती पत्नी मनोहर , शंकर पुत्र झगड़ू और बदामी पत्नी शिवराम को आवास आवंटित कर दिए गए । इसी प्रकार रानीपुर ब्लाक के ही उमती गांव के पिछड़ी जाति के सूरज पुत्र मंगर , सुशीला पत्नी स्व. लाली , तिलेसरी पत्नी स्व. बैजनाथ इंदू पत्नी संजय और लल्लन पत्नी स्व. साधू को लोहिया आवास आंवटित किया गया था। इन लाभार्थियों को आवास की पहली किश्त भी जारी हो चुकी थी। लेकिन चेक लाभार्थियों को देने की बजाया उसे जिम्मेदार अधिकारी उसे महीने भर तक अपने पास रखे। जब चेक बाउंस हो गए तो एक चाल चली गई। इस दौरान कुछ पात्रों के नाम छुटने की बात कहकर दूसरे नए लोगों के नाम को डाल दिया। पिछड़ी जाति के ही जिन नए लोगों को आवास आवंटित किए गए उनके नाम हैं- नीलम पत्नी दिनेश, कौशल्या पत्नी राजेश, मीरा पत्नी संतोष, लाली पत्नी भोला और उर्मिला पत्नी राम नगीना का नाम शामिल किया गया। शिकायतकर्ताओं ने इस बाबत सीडीओ के पास शिकायत दर्ज कराई तो सीडीओ ने तीन सदस्यीय टीम से जांच कराया तो यह खेल सामने आया।
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विधवाओं पर नहीं की गई दया
मऊ। जालसाजों ने चयनित लाभार्थियों के इस खेल में तीन विधवाओं पर दया नहीं दिखाई और उन्हें आवंटित आवास दूसरों को दे दिए।
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सयम से दे दिए होते चेक नहीं हो पाता घपला
मऊ। सीडीओ ने अपने पत्र में लिखा है कि यदि लाभार्थियों को जारी चेक सयम से उन्हें दे दिए गए होते तो पहली किश्त के धन से वे आवास का निर्माण शुरु करा चुके होते। इस प्रकार गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहती लेकिन इस कृत्य से ऐसा लगता है कि जिम्मेदारों ने पहले से ही सोच समझकर ऐसा प्लान बना रखा था और चेक बाउंस होने के बाद चयनित लाभार्थियों को बदलकर दूसरों को आवास दे दिए गए। जांच रिपोर्ट के साथ सभी आरोपों के साक्ष्य भी बीडीओ को भेजे गए हैं।
कोट
खंड विकास अधिकारी अपने पदीय दायित्वों के दुरुपयोग , कार्यके प्रति उदासीनता , गलत साक्ष्य प्रस्तुत कर लोहिया ग्रामीण आवास की प्रथम और द्वितय किस्त अवमुक्त करने के दोषी पाए गए हैं। बीडीओ को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है। आशुतोष कुमार द्विवेदी सीडीओ मऊ। इनसेट
क्या हैं मानक
मऊ। सपा सरकार के शासन काल में लोहिया ग्रामीण आवास का आवंटन उन गरीबों को किये जाने का प्रावधान था जो आवास विहीन हों और उनके नाम वर्ष 2011 में कराए गए बेस लाइन सर्वे मेंशामिल हों। सर्वै में भी काफी अनियमितता और ममामनी की शिकायतें आई थीं। लोहिया आवास के लिए प्रत्येक लाभार्थी को तीन लाख पांच हजार
रुपये दो किश्तों में दिए जाने थे।