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कटान की भेंट चढ़ी 60 बीघा उपजाऊ जमीन

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बिंदटोलिया गांव में अपने आगोस में घर को लेने का आतुर घाघरा नदी ।संवाद - फोटो : MAU
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मऊ। जनपद के देवारांचल में सरयू नदी कटान से नवली गांव के सीवान में शनिवार को 60 बीघा खेती की जमीन कट कर नदी में समा गई। जबकि 30 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं और कटान पीड़ित तीन स्कूलों में किसी प्रकार शरण लिए हैं। प्रशासन इनकी तरफ से मदद के लिए बेपरवाह बना है। हाल यह है कि कटान रोकने के लिए चल रहे प्रोजेक्ट भी अधर में लटके पड़े हैं। नदी की कटान से तीन सालों में बिंद टोलिया और आस पास के कई गावों की लगभग चार सौ एकड़ कृषि योग्य भूमि नदी में समा चुकी है। बिंदटोलिया गांव के 58 परिवारों के पक्के मकान नदी की धारा में समा चुके हैं। कटान पीड़ित परिवार प्राथमिक विद्यालय खैरा, प्राथमिक विद्यालय बिंदटोलिया, जूनियर विद्यालय टाड़ी मेंशरण लिए हैं। कटान रोकने के लिए चल रहे दो प्रोजेक्ट अधर में हैं। देवारा के चक्कीमूसाडोही ,बिंदटोलिया, खैरा देवारा, मनमन का पूरा, बइरकंटा ,तटवर्ती नवली, सरहरा, नईबाजार, चिऊटीडांड, रामपुर धनौली, बहादुरपुर, पतनई सहित सहित 30 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ से बचाव के लिए प्रशासन की तैयारी आधी अधूरी है। कटान रोकने के लिए बिंदटोलिया और दोहरीघाट के दो प्रोजेक्ट पर इस समय काम बंद है। इन पर 36 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। दुबारी : कटान पीडित आशीष साहनी, गोपाल, लालचंद, हरिश्चन्द्र, हिमांशु पल्टन, बिग्गू राम, जीत राम ,आशीष ,वालेश्वर, श्रवण, रामदेव, गोरख ने बताया कि नदी की धारा मोड़ने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकल रहा। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सरोज ने बताया कि पानी अधिक बढ़ जाने से कटान रोधी कार्य में कुछ बाधा आ रही है। फिर भी कटान रोकने के यथा संभव उपाय किए जा रहे हैं।
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