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धूम धाम से मना हजरत शुफी का उर्स

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मऊ। नगर के मुंशीपुरा में सूफी साहब का बड़े हर्ष उल्लाह के साथ हर साल के भाती इस साल भी जुलूस निकालकर उर्स मनाया गया। इस दौरान उनकी मजार पर चादरपोशी भी की गई।
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हुजूर सुफिए मिल्लत अलैहिर्रहमा सूफी मत के प्रचारक थे ।इनकी जन्म बलिया के सहतवार गांव में 1926 में हुआ था। । वो एक गरीब सुफी नूर मोहमद कादरी के परिवार में हुई थी उनके पिता नूर मोहमद कादरी रहमतुल्लाह अलैह भी सूफी मत के प्रचण्ड प्रचारक थे। इनका निधन 21अप्रैल 2005 को हुआ था । उनका बचपन गांव में गुजरा उनकी शिक्षा दीक्षा गांव में हुई। जब बड़े हुए तो बलिया से काशी में रोजी रोटी के तलास में चले गए । उन्होंने रेलवे में ,आरएमएस में नौकरी किया।सेवानिवृत होने के बाद जब उन्होंने यहां पर बगैर दिरहम के मस्जिद के लिए जमीन खरीदने का एलान कर दिया ये बात उन्होंने अपने मानने वालो से बताया तो मनाने वालो ने कहा कि कैसे खरीद जाएगा उन्होंने कहा अल्लाह पर भरोसा रखो। उनके मनाने वाले और वो खुद लोगो के दरवाजे दरवाजे जा कर चंदा इकठ्ठा किया चंदा इकठ्ठा कर एक जमीन खरीदी उस पर एक मस्जिद का निर्माण कराया। जो आज बनाम जमे मस्जिद हुजूरी के नाम से जानी जाती है। साथ ही मस्जिद के कुछ कमरो में मदरसा कादरिया मज्जाददीदिया सुरु कराया जो आज भी चल रहे है इसके साथ ही साथ उनकी तालीम लोगो के लिए आम थी की इंसानियत की हिफाजत करो साथ ही उनका मसहूर कॉल था रविवार को नगर क्षेत्र के मुंशीपुरा स्थित उनकी मजार पर लोगों ने जुलूस निकालकर चादरपोशी की। इस दौरान बच्चों के साथ साथ ,सदर अंजुमन हुजूरी नसीरुद्दीन, खलीफा हुजूर सुफी ए मिल्लत ,नाजिम ए आला ,डॉ इकबाल अहमद , नायब सदर,अब्दुल रहीम,मुट्वालीय ए दौरा पीर ए तरीकत हजरत मौलाना रोसन जमीर , नायब नाजिम इंजीनियर आदि मौजूद रहे।
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