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अंबेडकर विद्यालयों के शिक्षकों को छह माह से वेतन नहीं

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मऊ। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित अंबेडकर प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को छह महीने से वेतन नहीं मिल रहा है। यह स्थिति तब
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है जब सभी विद्यालयों के शिक्षकों के वेतन के लिए विद्यालयवार बजट शासन से मिलता रहता है। वर्तमान में सभी शिक्षकों के वेतन के लिए विभाग के
पास पर्याप्त बजट है। विभागीय अधिकारियों की धन उगाही प्रवृत्ति के चलते अध्यापकों को नियमित रूप से समय से वेतन नहीं दिया जा रहा है।
जिले में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित 56 अनुदानित अंबेडकर प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें 458 अध्यापक कार्यरत हैं। शासन से सभी शिक्षकों को वेतन के लिए विद्यालयवार बजट समाज कल्याण निदेशालय से आवंटित होता है। फिर भी कई विद्यालयों के शिक्षकों को पिछले नवंबर माह से वेतन नहीं मिला है।
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अध्यापकों का आरोप है कि विभाग की धन उगाही प्रवृत्ति के चलते विद्यालयों के प्रबंधकों की ओर से सभी शिक्षकों का वेतन बिल एक साथ समाज कल्याण विभाग को नहीं भेजा जाता है। यानी अगर एक विद्यालय पर 17 अध्यापक हैं , तो इनमें से पांच या सात का वेतन बिल पहले भेज दिया जाता है और सुविधा शुल्क न देने वाले अध्यापकों का वेतन लटका दिया जाता है। इस प्रकार यदि तीन से चार माह तक वेतन लंबित हो जाता है तो उसका एरियर बनाया जाता है और फिर इसके बाद 15 से 35 प्रतिशत की वसूली की जाती है। इन अध्यापकों की संख्या काफी कम है और इन स्कूलों में छात्रों की संख़्या भी कम है। इसी की धौंस दिखाकर अध्यापकों से वसूली की जाती है। अध्यापकों में से ही कई ऐसे हैं जो स्कूल कभी न जाकर समाज कल्याण विभाग के चक्कर काटे रहते हैं। इतना ही नहीं इन अध्यापकों को जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में ही विभिन्न काउंटरों में बैठे देख सकता है। ये अध्यापक विभागीय आला अफसर के मकान तलाशने से लेकर उनकी अन्य सुख सुविधाओं का इंतजाम करते देखे जा सकते हैं। इस बाबत नवागत जिला समाज कल्याण अधिकारी मुक्तेश्वर चौबे का कहना है अब कोई शिक्षक पढ़ाई के समय कार्यालय में बिना अवकाश के नहीं आएगा। शिक्षकों को समय से नियमित भुगतान किया जाएगा। जिन स्कूलों के शिक्षकों का वेतन लंबित है, उनके वास्तविक कारणों की जांच कराई जाएगी। बिना पर्याप्त कारणों के सभी शिक्षक का वेतन नहीं रोका जाएगा। धनउगाही की जांच कराई जाएगी।
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