मऊ। आयुष्मान भारत योजना के तहत चयनित लाभार्थियों में कुल 938 मरीजों ने एक साल में अपना उपचार कराया। इनमें से 519 ने जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों तथा 419 ने गैरजनपदों में अपना इलाज कराया। जिले के सरकारी अस्पतालों में अपेक्षित संसाधन नहीं हैं वहीं निजी अस्पताल में इलाज के बाद मिलने वाली राशि में लेटलतीफी होती है जिससे मरीज परेशान होते हैं। सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी के चलते ही बहुत से रोगियों ने दूसरे जिले के अस्पतालों में इलाज कराया।
आयुष्मान योजना को शुरू हुए एक वर्ष हो गए। इसके तहत जिले में एक लाख 3367 गरीब परिवारों को चिह्नित किया गया है। 55 हजार लोगों को गोल्डन कार्ड मिला। इनमें से एक वर्ष में 938 मरीजों ने उपचार कराया। इनमें 344 मरीजों निजी और 175 मरीजों ने सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया है। 161 मरीजों ने जिला अस्पताल और 14 अन्य सरकारी अस्पतालों तथा 344 मरीजों ने में हुआ है। जबकि गर के छह निजी अस्पतालों में इलाज कराया। शेष 419 मरीज जिले के अस्पतालों में अपेक्षित सुविधाएं न होने पर रेफर होकर वाराणसी, गोरखपुर या अन्य जिलों में अपना इलाज कराया है। वहीं कई मरीज ऐसे भी हैं जिन्हें योजना में शामिल निजी अस्पतालों ने टाल मटोल कर वापस कर दिया और सरकारी अस्पतालों में पहुंचने पर संसाधनों की कमी आड़े आई। इस संबंध में सीएमओ डॉ. सतीशचंद्र सिंह का कहना है कि योजना में शामिल मरीजों का सरकारी-गैर सरकारी अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है।
योजना में चयनित अस्पताल : आयुष्मान भारत योजना के तहत जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोपागंज, मुहम्मदाबाद गोहना और घोसी चयनित है। जबकि निजी अस्पतालों में शारदा नारायण, प्रकाश नर्सिंग होम, राहुल नर्सिंग होम, आशीष नर्सिंग होम, वंदना नर्सिंग होम और स्वास्तिक नर्सिंग होम शामिल हैं।
यह हॉल है सरकारी अस्पतालों का : मऊ। योजना में जिले के पांच सरकारी अस्पताल शामिल हैं। इनमें जिला अस्पताल और महिला जिला अस्पताल में 90 फीसदी तक आयुष्मान योजना के लाभार्थी इलाज कराने पहुंचते हैं लेकिन चिकित्सक तथा संसाधनों की कमी के चलते उनको इसका लाभ नहीं मिल पाता है। हालात यह है कि जिला अस्पताल में एक साल में हड्डी और आंख से संबंधित एक भी मरीज का उपचार नहीं हो सका है। कारण हड्डी रोग की ओटी में ऑपरेशन चेयर नहीं होना है। इसके अलावा अस्पताल में डेटिंस्ट सर्जन, कार्डियोलाजिस्ट, गायनिक चिकित्सकों की कमी है। वहीं महिला अस्पताल में महिला सर्जन और महिला चिकित्सकों की कमी मरीजों के सुविधा में आड़े आ रही है।
शिकायत के लिए गठित है टीम : मऊ। सीएमओ डॉ. सतीशचंद्र सिंह ने बताया कि आयुष्मान योजना में शामिल सरकारी या निजी अस्पताल की ओर से मरीजों के इलाज में लापरवाही बरती जाती है तो इसकी शिकायत वो सीधे उनसे कर सकते हैं। हालांकि आयुष्मान योजना के तहत जिला कार्यान्वयन इकाई (डीआईयू) गठित की गई है।
1350 बीमारियों का होता है इलाज : मऊ। आयुष्मान योजना के तहत 1350 बीमारियों का उपचार मुफ्त होना है। इनमें कैंसर, ओपन हार्ट सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, रेडियोलॉजी जैसी गंभीर व बेहद खर्चीली बीमारियों को शामिल किया गया है। योजना के तहत हृदय रोग के 130, नेत्र रोग के 42, नाक-कान-गला के 94, हड्डी के 114, मूत्र रोग के 161, महिला रोग के 73, शल्य रोग के 253, न्यूरो सर्जरी, न्यूरो रेडियोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी व बर्न सर्जरी के 115, दंत रोग के नौ, बाल रोग के 156, मेडिकल के 70, कैंसर के 112 और अन्य बीमारियों के 21 पैकेज के मुफ्त उपचार की सुविधा उपलब्ध मिलनी है। जिले के सरकारी अस्पतालों में आंख, दंत रोग, मूत्र रोग, महिला रोग, शल्य रोग न्यूरो सर्जरी, न्यूरो रेडियोलॉजी की ना तो सुविधा है ना विशेषज्ञ चिकित्सक।