बढुुआगोदाम। राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो के तत्वाधान में शनिवार को क्षेत्र के ताजपुर पतिला गांव में कृषक प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को सूक्ष्म जीवों पर आधारित खेती करने के टिप्स दिए गए।
ब्यूरो के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यही है कि किसान धीरे-धीरे ही सही पर रसायन-आधारित कृषि पद्धतियों से हटें और बदले में सूक्ष्मजीव और अन्य पौध-उत्पादों पर आधारित खेती के उपायों को आत्मसात करें। जिससे कृत्रिम रसायनों के अधिकाधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों से बचा जा सके। वैज्ञानिक डॉ. रेनू ने बताया कि परंपरागत कृषि रसायन आधारित खेती के तौर-तरीकों में बदलाव वर्त्तमान में अत्यधिक वांछित है। इसका प्रमुख कारण कृषि रसायनों के व्यापक और अत्यधिक उपयोग से न केवल खेतों की दशा का ख़राब होना है बल्कि इन रसायनों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर घटक दुष्परिणाम भी दिखने होने लगे हैं। डॉ. प्रमोद साहू ने बताया कि मिट्टी के साथ ही साथ पीने के पानी का प्रदूषण भी इन रसायनों के उपयोग की एक बड़ी देन है जो अब समस्या के रूप में सामने आ रहा है। समस्याओं के समूल निराकरण के रूप में सूक्ष्मजीव, गुणवत्तायुक्त कंपोस्ट और पौध-आधारित प्राकृतिक तत्व अनुकल्पों के रूप में अब किसानों के सामने कई विकल्प उपलब्ध हैं। वैज्ञानिकों ने किसानों के खेतों में ही प्रतिभागी किसानों के समक्ष बीज, जड़ और मृदा शोधन के प्रयोगों को प्रदर्शित करने के साथ ही खेतों में उगे आलू और गेंहूं की फसलों पर इन जीवों के जलीय अनुकल्पों का छिड़काव भी किया। साथ ही मिट्टी में इन जीवों से संपोषित कंपोस्ट का भी प्रयोग भी करके दिखाया।