दोहरीघाट। क्षेत्र के गोठा में चल रही रामलीला में राम-भरत मिलन सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। रामलीला में अयोध्यावासियों के साथ भरत, शत्रुघ्न जुलूस के रूप में गुरु वशिष्ठ के नेतृत्व में चित्रकूट के लिए प्रस्थान करते हैं। जुलूस जब श्रृंगेश्वरपुर के समीप पहुंचता है। इसकी खबर जब निषादराज को मिलती है तो निषादराज दुखी मन से विचार करता है कि भरत के मन में कपट भाव है। इसलिए अपने जाति वालों से जुलूस को नदी तट पार न करने देने के लिए सावधान करता है। साथ ही भरत से लड़ाई करने के लिए निर्देश देता है। बुजुर्ग व्यक्तियों की सलाह पर भरत से मिलने के बाद भरत प्रेम देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता है।
वहीं, भरत के आने की खबर पाकर लक्ष्मण आक्रोशित हो जाते हैं। चित्रकूटवासी भयभीत हो जाते हैं, तभी आकाशवाणी होती है कि हे तात लक्ष्मण कोई भी काम हो उसे समझ बूझकर किया जाए। राम लक्ष्मण को समझाते है कि भरत सरीखा पुरुष ब्रह्मा की सृष्टि में न तो देखा गया है और न ही सुना गया है। चित्रकूट के राम कुटी के समीप भरत और अयोध्यावासियों ने नदी में स्नान किया। सभी लोगों को नदी के समीप ठहराकर माता, मंत्री और गुरु की आज्ञा पाकर निषादराज और शत्रुघ्न को साथ लेकर भगवान राम के पास पहुंचते हैं। वहां राम भरत का मिलन होता है। राम भरत प्रेम देखकर दर्शक भाव विह्वल हो गए।