घाघरा में बाढ़ आने से घोसी तहसील के दोहरीघाट तथा मधुबन तहसील क्षेत्र के हजारों एकड़ फसल जलमग्न होकर नष्ट होने से खेती किसानी पर संकट गहराने लगा है। धान की फसल नष्ट होने से किसानों को खून के आंसू रोना पड़ रहा है। फसल क्षति का आकलन कर मुआवजा दिलाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है।
सिंचाई विभाग तथा प्रशासन की ओर से बाढ़ से निजात दिलाने के लिए योजनाएं तो प्रतिवर्ष बनायी जाती है, लेकिन अभी तक जल निकासी की मुकम्मल व्यवस्था नहीं की जा सकी है। महकमे की ओर से बनाई गई योजनाएं फाइलों में ही सिमट कर रह जाती है। घाघरा ने इस वर्ष कई बार कहर बरपाया है। घाघरा में उफान आने से विभिन्न क्षेत्रों में नष्ट हुई फसलों पर नजर डाला जाए तो घोसी तहसील के तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नई बाजार, नौली, चिऊंटीडांड़, लामी, तारनपुर, कादीपुर, हरधौली, बहादुरपुर, बुढावर, पतनई, सरयां, ठिकरहिया, नगरीपार, रसूलपुर, सूरजपुर, सिपाह, खरकौली,गोड़ौली, चकभगवानदास सहित दर्जनों गांवों की हजारों एकड़ फसल जलमग्न होकर नष्ट हो गई है। इसी तरह मधुबन तहसील के देवारा इलाके के धरमपुर, विशुनपुर, बिंदटोलिया, खैरा, बैरकंटा, भगत का पुरा, मनमन का पुरा, हरिलाल का पुरा, धर्मपुर, टाड़ी, संभारू का पुरा, मोलनापुर, गजियापुर, कुंवरपुरवा, और चक्कीमूसाडोही सहित विभिन्न गांवों की सैकड़ो एकड़ धान, गन्ना, बाजरा सहित तमाम फसलें जलमग्न होकर नष्ट हो गई है। इस संबंध में रामबचन प्रसाद, परभंस, श्रीकांत शर्मा कहना था कि बाढ़ के पानी की निकासी के लिए रेगुलेटर लगाए जाने की मांग अरसे की जा रही है, लेकिन आज तक मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। हालत यह है कि हजारों एकड़ फसल बाढ़ की भेंट चढ़ गई। इस बाबत अपर जिलाधिकारी डीबी पाल का कहना था कि पानी कम होते ही बाढ़ व जलजमाव से हुए नुकसान का सर्वे कराए जाने के लिए उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है।