चिरैयाकोट। थाना क्षेत्र के ग्राम पचीस्ता गांव में रास्ते की तरफ दरवाजा खोलवाने गई पुलिस को ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। इस दौरान ग्रामीणों के विरोध करने पर पुलिस टीम को बिना कार्रवाई के बैरंग वापस लौटना पड़ा।
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पचीस्ता में प्रमोद मौर्य पुत्र सुब्बा मौर्य और राम वृक्ष गोड़ पुत्र सूरत का मकान आमने सामने है। दोनों के मकानों के बीच से गांव वालों के आने जाने के लिए एक सार्वजनिक रास्ता है । रास्ते की तरफ प्रमोद मौर्य अपने मकान का दरवाजा खोल रहा था जिसे रामवृक्ष गौड़ यह कहते हुए रोक रहा था कि यह दरवाजा नहीं खुलेगा क्योंकि आने जाने में परेशानी होगी । दरवाजा खोले जाने से मना करने की बात को लेकर प्रमोद मौर्य ने अपने मकान का दरवाजा खोलवाने के लिए मुहम्मदाबाद गोहना के तहसीलदार को प्रार्थना पत्र दिया था। शनिवार की शाम तीन बजे नायब तहसीलदार जावेद अक्खतर थानाध्यक्ष संजय सिंह के साथ एस आई अरविंद यादव , एस आ धनंजय सिंह व अन्य सिपाहियों के साथ ग्राम पचीस्ता पहुंच कर दरवाजा खोलवाने लगे।इसका विरोध रामवृक्ष गौड़ के परिवार के लोग करने लगे। आरोप है कि इतने में एक पुलिसकर्मी ने रामवृक्ष की लड़की कौशिल्या के सिर के बाल पकड़ कर जमीन पर गिरा दिया। यह देख मौके पर मौजूद लोग आक्रोशित हो गये तथा पुलिस से हाथापाई होने लगी। लोगों का विरोध यह देख नायब तहसीलदार सहित थानाध्यक्ष और पुलिसकर्मी बैरंग वापस लौट गए। हाथापाई में कौशिल्या (30 ) , उर्मिला (25 ) , राजेश्वरी (53 ) को मामूली चोटें भी आई। इस संबंध में ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दिनों पहले हुई पंचायत में दरवाजा न लगाने पर सहमति हुई थी ।शनिवार को पुलिस और राजस्व अधिकारी जिलाधिकारी का आदेश बताकर दरवाजा लगवाने लगी। विरोध करने वालों ने जब जिलाधिकारी के आदेश को दिखाने को कहा तो पुलिस ने इनकार कर दिया और अपशब्द बोलने लगी। इस संबंध में सीओ आलोक जायसवाल का कहना है कि सिपाही द्वारा महिला के बाल पकड़कर गिराने का आरोप बेबुनियाद है। वैसे इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी ।