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392 पौधों को मिली जिंदगी, बाकी बने पशुओं का निवाला

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मधुबन। हर साल पर्यावरण संरक्षण के नाम पर निकायों द्वारा पौधे लगाए जाते हैं। लेकिन इसमें बमुश्किल 20 से 30 फीसदी ही पौधे अस्तित्व में आ पाते हैं। कारण जिम्मेदारों की उदासीनता। ऐसा ही कुछ मधुबन नगर पंचायत में देेखने को मिल रहा हैं। यहां सरकारी तथा निजी परिसरों में लगाए गए पौधे पेड़ बनने को अग्रसर हैं, वहीं खुले जगहों पर लगे पौधे देखभाल के अभाव में या तो सूख चुके हैं या मवेशियों की खुराक बन चुके हैं। नगर पंचायत ने 2019 में 15 अगस्त तक दो चरणों में कई जगहों पर 744 पौधे लगाए थे। लेकिन इन पौधों में 392 पौधों ही आकार ले सके। इसके पीछे वजह थी यह सभी पौधे रोडवेज परिसर, जलकल, बीआरसी तथा नगर पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय, पांती के पशु आश्रम स्थल, सभासद लाल बहादुर के हाता में लगाए गए थे। सुरक्षा तथा व्यक्तिगत रुचि के चलते नियमित देखभाल का सकारात्मक परिणाम यह रहा है कि पौधे अपना अस्तित्व बचाने में सफल रहे। जबकि शेष पौधे जो कि खुली सड़क या कबिस्तान या अन्य जगहों पर लगाए गए थे। वह पशुओं के भोजन या देखरेख के अभाव में सूख गए। जबकि नगर पंचायत ने बीते दो सालों में 15 वार्डो में अलग अलग जगहों पर करीब 1499 से अधिक पौधे लगाए गए हैं।लेकिन पौधों की सुरक्षाके लिए ब्रिक गार्ड ,आयरन जाली आदि का इंतजाम ना होने से बमुश्किल 40 फीसदी से भी कम पौधे ही बच सके। वहीं इस वर्ष भी नगर पंचायत द्वारा 755 पौधे लगाए गए हैं। ऐसे में उम्मीद हैं बीते वर्ष से सबक लेते हुए जिम्मेदार इस बार तो पर्यावरण संरक्षण के प्रति खुद जागरूकता लाते हुए इन सभी पौधों को बचाने का प्रयास करेंगे।
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