धान की फसल तैयार होने में अभी समय है लेकिन शासन से धान क्रय केंद्र स्थापित करने की कवायद शुरू कर दी है। जिले में धान की फसल खरीदने के लिए कुल 35 क्रय केंद्र बनाए गए है। साथ ही जीयो टैगिंग की व्यवस्था भी लागू की है। इस प्रक्रिया के लागू होने से क्रय केंद्रों के साथ राइस मिल की भौगोलिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। हालांकि जिले में धान खरीद एक नवंबर से शुरू होगा। ऐसे में तैयारियां अंतिम चरण में चल रही हैं।
किसानों को धान खरीद का उचित मूल्य दिलाने के लिए शासन की तरफ से धान खरीद योजना संचालित की गई है। जिले में प्रतिवर्ष खाद्य विपणन, पीसीएफ, यूपी एग्रो, भारतीय खाद्य निगम की ओर से धान क्रय केंद्र बनाए जाते हैं लेकिन क्रय केंद्रों पर किसानों के संग एजेंसियां मनमानी करती थी। इससे किसानों को तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ता था। किसानों की समस्याओं को देखते हुए इस बार शासन ने खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए जीयो टैगिंग की व्यवस्था लागू की है। धान खरीद में इसके सफल होने के बाद गेहूं की खरीद में भी इसे लागू किया जा सकता है। जिले में पहली बार राइस मिलों और क्रय केंद्रों की जीयो टैगिंग की व्यवस्था की जा रही है। रिमोट सेंसिंग विभाग की टीम एक मोबाइल एप विकसित करेगी। जिसमें सभी क्रय केंद्र, सत्यापित राइस मिल तथा भारतीय खाद्य निगम के डिपो मैप रहेंगे। मोबाइल एप के माध्यम से क्षेत्रीय विपणन अधिकारी राइस मिलों की क्रियाशीलता से संबंधित चार अलग-अलग फोटो जीयो टैग कराएंगे। धान खरीद एक नवंबर से होगी लेकिन खरीद की तैयारी तेज हो गई है। विभाग की तरफ से जिले में 35 धान क्रय केंद्र बनाए गए हैं। खाद्य निगम के नौ, भारतीय खाद्य निगम के दो, पीसीएफ के 22, यूपी एग्रो के दो क्रय केंद्र हैं। अब तक 995 किसानों ने धान खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो किसानों का जितना जल्दी ऑनलाइन पंजीकरण होगा धान खरीद प्रक्रिया तेज गति से होगी।
धान खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए जीओ टैगिंग प्रक्रिया चल रही है। जिले में 35 धान क्रय केंद्र बनाए गए हैं। शीघ्र ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। - वीके सिन्हा, जिला खाद्य विपणन अधिकारी