मऊ। वित्तीय वर्ष बीतने में अभी दो माह से ज्यादा का समय है, लेकिन कई विभागों में अभी तक लगभग 31 से 68 प्रतिशत तक ही खर्च हो पाया है। जबकि 32 विभागों में फूटी कौड़ी नहीं मिली है। वर्ष 2017-18 में कुल व्यय के 2590200 लाख के सापेक्ष 1497592 लाख रुपये अवमुक्त किया गया। शासन से अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष 94.64 प्रतिशत खर्च कर दी गई है।
वित्तीय वर्ष पूरा होने की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे-वैसे विभागों में बजट खपाने की रणनीति तेज होने लगी है। विभागों मेें दिसंबर 2017 तक के अवमुक्त धनराशि सापेक्ष अवशेष धनराशि के आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो कृषि विभाग में चार लाख के सापेक्ष 42.67 प्रतिशत, गन्ना विकास में 8.17 लाख के सापेक्ष 63.77 प्रतिशत, लघु एवं सीमांत कृषकों को सहायता 57.48 लाख के सापेक्ष 31.26 प्रतिशत ही खर्च हो पाया है। इसी तरह दुग्ध विकास में 4.36 लाख के सापेक्ष 33.21 प्रतिशत, वन विभाग में 87.07 लाख के सापेक्ष 64.47 प्रतिशत ही खर्च किया जा सका है। भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग में 143.64 लाख के सापेक्ष 45.69 प्रतिशत खर्च हो पाया है।
इसी तरह मनरेगा, प्रादेशिक विकास दल विभाग में शत प्रतिशत धनराशि खर्च कर दी गई है। सेवायोजना में 74 हजार के सापेक्ष 40.54 प्रतिशत खर्च कर दिया गया है। जबकि उद्यान विभाग, मत्स्य विकास, सहकारिता, सामुदायिक विकास, निजी लघु सिंचाई, प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा सहित 32 विभागों मेें एक पाई धनराशि जारी नहीं की गई है। वित्तीय वर्ष बीतने में दो माह का समय है। अधिकारी अवशेष पड़े बजट को खर्च करने की रणनीति बनाने में लगे हैं।