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चुनावी मुद्दे

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जब जब लोकसभा चुनाव आते हैं, मुद्दे उछलते रहते हैं। कुछ पूरे होते हैं,कुछ स्थाई ही बने रहते हैं। ऐसे ही मुद्दे जिले में भी हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भी प्रत्याशियों के समक्ष मुद्दे आए थे। इनमें से कुछ पूरे हुए, अधिकांश अब भी उसी तरह बरकरार हैं।
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जिले का सबसे ज्वलंत मुद्दा बालनिकेतन क्रासिंग पर ओवरब्रिज निर्माण का है।ओवर ब्रिज निर्माण की मांग लगभग चार दशक पुरानी है। हर चुनाव में इसके निर्माण कराने के दावे किए जाते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा सहित सभी प्रमुख दलों के प्रत्याशियों ने इसके निर्माण में सहयोग का वादा किया था। भाजपा प्रत्याशी की जीत हुई लेकिन मुद्दा जहां का तहां ही रह गया। रेलवे स्टेशन पर वाशिंग पिट और टर्मिनल भी बनाने की कवायद कई सालों से चल रही थी। लगभग साढ़े छह साल पहले कांग्रेस शासन काल में तत्कालीन रेल मंत्री ने टर्मिनल का शिलान्यास भी किया था। भाजपा सरकार आने पर टर्मिनल निर्माण की प्रक्रिया स्थगित हो गई थी। इसे अन्यत्र स्थानांतरित करने की अटकलें लगने लगी थीं। लेकिन बाद में इसमें सक्रियता आई और अब टर्मिनल निर्माण पूरा हो गया है। वाशिंट पिट का काम भी लगभग पूरा हो गया है। राजेंद्र सिंह कहते हैं कि प्रतिनिधि वही सही है तो जनहित से जुडे मुद्दों पर गंभीर हो और सरकार पर दबाव बनाकर उन मुद्दों को सुलझाए। वरना फिर चुनाव मैदान में आने पर जनता को जवाब देना काफी मुश्किल होता है। कहते हैं कि बालनिकेतन क्रासिंग पर ओवरब्रिज निर्माण काफी ज्वलंत मुद्दा है। लेकिन इस अब तक के सभी जनप्रतिनिधियों ने उपेक्षा ही बरती है। लेकिन अब जनता जागरूक हो गई है। जनप्रतिनिधि अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकते।
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