नगर के बड़ा गांव स्थित शिया मोहल्ले में 15 सफर बृहस्पतिवार की रात आठ बजे नेशनल मांटेसरी स्कूल के पास कमेटी तनजिमे बाबुल हवाएज द्वारा शब्बेदारी का आयोजन किया गया। इमामे हुसैन के भाई मौला अब्बास की याद में हुूई शब्बेदारी में खासी संख्या में अजादारों ने हिस्सा लिया।
इससे पूर्व हुई मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मोजाहिर हुसैन ने कहा कि मजलिस, शब्बेदारी, जुलूस का असली मकसद देश को एकता और अखंडता का पैगाम देना है। कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने 14 सौ साल पहले कर्बला में जुल्म और जालिम के खिलाफ जंग कर मजलूम और इंसानियत की पहचान कराई। ऐसे में जहां इंसानियत जिंदा है, वहीं कर्बला का पैगाम भी जिंदा है। कहा कि 10 मोहर्रम को जब बच्चे पानी-पानी की सदा लगाने लगे तो इमामे हुसैन ने मौला अब्बास को पानी के लिए भेजा। लेकिन यजीदी फौजियों ने उन्हें दरिया किनारे बाजू काट कर शहीद कर दिया। कर्बला में इमामे हुसैन और उनके परिवार पर कोई जुल्म नहीं छोड़ा गया। शब्बेदारी की निजामत मौलाना शफ़क़त तक़ी ने की। अंजुमनों ने नौहा मातम कर अली अब्बास को खिराजे अकीदत पेश की। शब्बेदारी का जुलूस कदीमी रास्ते बड़ा फाटक होते हुए सदर इमाम बारगाह पर समाप्त हुआ।
इस अवसर पर डॉ शानू , अरशद, इजहारुल हसन, तफहिम, मोहम्मद अली, शमीम हैदर, इम्तेयाज, असगर नासरी, फिरोज, वसीम समेत काफी संख्या में अजादार शामिल रहे।