मुहम्मदाबा गोहना के उदासीन ऋषि आश्रम संगत में श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन गुरुवार को रात्रि में अमरकंटक (मध्य प्रदेश) से पधारे कथावाचक स्वामी योगेश्वरानंद महाराज ने मौजूद श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण का वर्णन सुनाया। कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण सच्चे सुख की प्राप्ति का साधन बताता है।
कथा के पहले दिन कथावाचक ने श्रीमद्भागवत महापुराण का वर्णन करते हुए कि दुनिया में जितने भी प्राणी है वे सभी शांति और सुख की तलाश में है। सुख और शांति पाने के लिए प्रत्येक प्राणी की चेष्टा हुआ करते है, कुछ प्राणी सुख का अहसास कर पाते हैं, लेकिन सभी प्राणी अपने संकल्पित सुख हो पाने के लिए प्राय: असफल रहते हैं। उनमें मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जो सच्चे सुख की तलाश में अनादि काल से प्रयासरत है। कहा कि भक्ति, ज्ञान और वैराग्य प्रत्येक मनुष्य में है, जिन्हें वह जागृत कर खुद की पहचान कर सकता है। ऐसी स्थिति में उसे सच्चे सुख का दर्शन होने लगता है। श्रीमद्भागवत महापुराण इसी सच्चे सुख की प्राप्ति का साधन बताता है। कथा के पूर्व उदासीन आश्रम रानोपाली, अयोध्या से पधारें महंत भरत दास ,महंत सत्यनाम दास महाराज,बेलवा मठ तथा संगत मंदिर गोरखपुर से पधारे महंत उमाशंकर दास जी ने दीप प्रज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया । इस मौके पर महंत ठाकुर दास ,महंत विद्यानंद महाराज ,बाबा राजीव दास, मनोहर दास बाबा, जय प्रकाश दास सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।