गेहूं की फसल कटने के बाद खाली पड़े खेतों में मूंग की बुआई कर किसान दोहरा फायदा उठा रहे है। मूंग की फसल में फलियां पकने की स्थिति में पहुंच गई है। अच्छी फसल से किसान फूले समा नहीं रहे हैं।
परदहां विकास खंड क्षेत्र के पिपरीडीह, भार, उस्मानपुर, रैकवारेडीह, सरेजा, कहिनौर, कुशमौर, पहाड़पुर, सुवराबोझ, पतिला अहिलाद, खरगजेपुर,सिहांव सहित क्षेत्र के विभिन्न गांवों में जायद की फसल की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। खाली पड़े खेत में मूंग की खेती किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसकी खेती से जहां किसानों को अच्छी आमदनी होती है। वहीं किसानों को दलहन की आवश्यकता भी पूरी होती है। जबकि खाली पड़े खेतों को पोषक तत्वों के साथ-साथ हरी खाद की भी मिल जाती है।
कृषि विशेषज्ञ ओपी सिंह ने बताया कि गर्मियों में विभिन्न किस्मों की दलहनी फसलो में मूंग की खेती का विशेष स्थान है।मूंग की खेती के फायदे को देखते हुए कृषि विभाग की तरफ से भी किसानों को इस फसल की खेती करने के लिए प्रेरित किया जाता है।मूंग की खेती से अतिरिक्त आय,खेतो का खाली समय में सदुपयोग, भूमि की उपजाऊ शक्ति में सुधार होता है। ओपी सिंह ने बताया कि मूंग की फसल का इस समय हरी खाद के रूप में इसतेमाल किया जा सकता है। इस समय मूंग की फलियां पक कर तैयार है।पकी हुई फलियों को तोड़ने के बाद खेत में बची फसल को मिट्टी पलट हल से जुताई करा दे।जो दस से पंद्रह दिन में सड़ कर हरि खाद बन जाएगी।