मऊ। जिले के कई गांवों के सार्वजनिक स्थलों पर लगे हैंडपंपों का लाभ लोगों को मिलता नजर नहीं आ रहा है। जल निगम की तरफ से वर्षो पूर्व गांवों में इंडिया मार्क टू हैंडपंपों को लगाया तो गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद दंबंगों ने हैंडपंपों को अंदर करा दिया। कई गांवों में लगे हैंडपंपों में सबमर्सिबल लगा दिए गए हैं। लगभग 500 हैंडपंप चहारदीवारी के अंदर हो गए हैं। सब कुछ जानकर विभागीय अधिकारी मौन हैं। जबकि सार्वजनिक स्थानों पर हैंडपंपों को लगाने की मांग वर्षो से हो रही है।
जिले में 684ग्राम पंचायतें हैं। पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के क्रम में जल निगम की तरफ से 31237 इंडिया मार्क टू हैंडपंप लगाए गए हैं। ग्रामीणों की जरूरत के हिसाब से इंडिया मार्क टू हैंडपंप लगाए जा सके हैं। जिले के प्रत्येक गांवों में एक से दो हैंडपंप यानि 500 हैंडपंप चहारदीवारी के अंदर आ गए हैं या सबमर्सिबल लग गए हैं। सबमर्सिबल चलने के दौरान हैंडपंप को चलाने पर भी पानी नहीं निकलता है। ऐसे में लोगों को शुद्ध पानी मयस्सर नहीं हो पा रहा है। प्रदूषित पानी के सेवन से लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। विधायक निधि से लगने वाले हैंडपंपों पर नजर डाला जाए तो वर्ष 2017-18 में 582 हैंडपंप लगाए गए। जबकि वर्ष 2018-19 में विधायक निधि से लक्ष्य 566 के सापेक्ष 395 हैंडपंपों का प्रस्ताव विभाग को मिल चुका है। इस बाबत जल निगम के अधिशासी अभियंता एमए किदवई का कहना है कि जल निगम की तरफ से हैंडपंप सार्वजनिक स्थलों पर ही लगाए गए थे। शासन की तरफ से हैंडपंपों के रख रखाव की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों को सौंप दिया है। अपर जिलाधिकारी डीपी पाल का कहना है कि सार्वजनिक स्थलों पर लगे हैंडपंपों पर कब्जा करने की शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।