मऊ। वाराणसी-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के फोर लेन निर्माण के लिए किसानों की अधिगृहित जमीन के मुआवजा मामले में एकपक्षीय फैसला देेने के बाद किसान ठगे महसूसू कर रहे हैं। इस बारे में राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश महासचिव देवप्रकाश राय ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है।
किसान नेता ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में लिखा है कि वाराणसी-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के फोर लेन निर्माण में जिले के किसानों के प्रतिकर के रुप में अब तक करीब आठ सौ करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। जिन नियम और शर्तो के आधार पर यह धनराशि वितरित की गई है उसमें अब भूमि अधिग्रहण से संबंधित अधिकारी बदलाव कर सड़क की भूमि लागत को घटाकर सरकार से शाबसी पाना चाहते हैं। उन्होने कहा है कि जिलाधिकारी द्वारा गत 21 फरवरी को दिया गया फैसला प्रदर्शित करता है कि भूमि अधिग्रहण का 800 करोड़ की धनराशि वितरित हो चुकी है। उसमें प्रशासन द्वारा विभिन्न गांवों में भूमि का रेट 3600 रुपये से लेकर पांच हजार प्रतिवर्ग मीटर की दर से जमीनों का मुआवजा दिया गया है। जिलाधिकारी ने अपने फैसले में बढ़ुआगोदाम, कटरा की जमीन का दर 2500 रुपया प्रति वर्ग मीटर स्वीकृत किया है। बढुआगोदाम में 255 मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। जहां सड़क पर 40 से 50 लाख प्रति मंडा जमीन बिक रही है। जबकि प्रशासन से निर्धारित सर्किल रेट से 20 लाख रुपया के आसपास हो रहा है। कटरा, बख्तावरगंज, हकीकतपुर, सहरोज, रेवरीडीह आदि गांवों के किसानों की अधिग्रहित जमीन के मुुवावजा वितरण में नाइंसाफी की गई है। मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।