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श्रद्धा और विश्वास का सम्मिलन है शिव पार्वती विवाह

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दुबारी।अमर शहीद कुंवर मुन्नी सिंह तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के स्मृति में क्षेत्र के तिघरा गांव स्थित मां भगवती मां भागेश्वरी मंदिर के प्रागंण में चल रही श्रीराम कथा के दूसरे दिन गुरुवार को कथावाचक रमेश भाई शुक्ल ने कहा कि शिव विश्वास के प्रतीक हैं और पार्वती श्रद्धा की प्रतीक हैं। श्रद्धा और विश्वास का सम्मिलन ही शिव और पार्वती का विवाह है। विवाह के उपरांत ही मां पार्वती शिव को प्रसन्न करती हैं और शिवजी श्री राम कथा प्रारंभ करते हैं। इसी से राम कथा और श्रीराम जी के जन्म दोनों का प्रत्यक्ष रूप से राम कथा सुनने और भगवान राम के जन्म के बाद दर्शन करने का अवसर मानव के जीवन में आता है। यही शिव और पार्वती के विवाह का धार्मिक व आध्यात्मिक पक्ष है। कहा कि भगवान राम का जन्म शिव पार्वती के विवाह के बाद ही हुआ है। जब तक हमारे जीवन में श्रद्धा विश्वास का मिलन नहीं होगा तब तक राम जन्म भी नहीं होगा। श्रद्धा का जन्म हिमालय और मैना के द्वारा होता है। हिमालय स्थिरता ऊंचाई और शीतला का प्रतीक है। इस अवसर पर सांसद हरिनारायण राजभर, घोसी और पूर्व विधायक अमरेश चंद पांडेय, अमित तिवारी, अभिराम शर्मा, पंकज बाबा, रामजीत शर्मा, धर्मेंद्र सिंह, राम बचन शर्मा आदि शामिल रहे।
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