मऊ। मौसम में आए बदलाव से खेती किसानी पर संकट गहराने लगा है। दिसंबर माह में तापमान बढ़ने से किसानों को फसल नुकसान की चिंता सताने लगी है। दिसंबर माह में जो ठंड पड़नी थी। वैसी ठंड नहीं पड़ रही है। जिससे फसलों को फायदा मिलता नजर नहीं आ रहा है। तापमान बढ़ने से दलहनी तथा तिलहनी फसलों में कीट प्रकोप बढ़ने की संभावना प्रबल हो गई है। वहीं रबी की मुख्य फसल गेंहू के ग्रोथ पर असर पड़ सकता है।
रबी फसल मुख्य फसल गेहूं का रकबा जिले में 95हजार हेक्टेयर का है। जिसमें लगभग पांच-पांच हजार हेक्टेयर दलहनी तथा तिलहनी फसलों की बुआई की गई है। लगभग 90 प्रतिशत बुआई हो चुकी है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो दिसंबर माह में गेहूं की फसल के लिए अधिकतम तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तथा दलहनी,तिलहनी फसल के लिए अधिकतम 15 से 18 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। जबकि वर्तमान में अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।वर्तमान में ठंड पड़ने की बजाय गर्म मौसम का दुष्प्रभाव गेहूं पर पड़ रहा है। इसकी वृद्घि रूक रही है।वर्तमान में अधिकतम न्यूनतम तापमान गेहूं की फसल के अनुकूल नहीं चल रहा है। जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।आसमान में छा रहे बादल से दलहनी, तिलहनी फसलों में सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना है और इसका असर कहीं- कहीं पर दिखाई देने लगा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार तापमान की वृद्घि से दलहनी, तिलहनी फसलों पर कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। बचाव के लिए कीटनाशक या जैविक छिड़काव तत्काल करने से नुकसान से बचा जा सकता है। गेहूं की फसल के ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। किसानों का कहना है वर्तमान का मौसम रबी फसलों के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है। खासकर गेंहू व दलहनी फसलों के लिए तो बिल्कुल ही नहीं। तापमान अधिक होने से गेंहू की वृद्घि पर असर हो रहा है। वहीं दलहनी फसल अरहर,मसूर, चना पर कीटों का प्रकोप होने लगा है।मेढ़ों में लगी अरहर के पौधे सूखने लगे हैं।
जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार कहना है कि दीमक लगने से भी पौधे सूखते हैं। दवाओं का छिड़काव कर इसे बचाया जा सकता है। किसान कृषि विभाग से संपर्क कर दवाओं का छिड़काव कर सकते हैं।
क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
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स्वयंसेवी संस्था नेफोर्ड के निदेशक तथा पूर्व निदेशक रिसर्च फैजाबाद कृषि विश्वविद्यालय डॉ. रामकठिन सिंह का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली मौसम की अनिश्चितता खेती किसानी को कई तरह से प्रभावित करती है। तापमान बढ़ने से फसलों पर विपरीत असर पड़ रहा है। लेकिन अभी अधिकतम तापमान मानक से चार डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। इसलिए किसानों को चिंतित होनेे की जरूरत नहीं है। यदि आगे के दिनों में भी तापमान घटता नहीं है तो इसका कुप्रभाव रबी की फसलों पर स्पष्ट देखने को मिलेगा। देखा जाए तो अभी-अभी किसानों ने रबी फसलों की बुआई पूरी की है। कई जगह तो गेहूं की बुआई अभी भी चल रही है। ऐसी दशा में तापमान के चार डिग्री की बढ़त से फसलों पर कोई नुकसान होने की संभावना नहीं है। वैसे भी रबी की फसलों पर बढ़ते तापमान का असर सबसे ज्यादा तब होेता है, जब पौधों में किल्ले फूटने लगते हैं अथवा जब दाने बनने शुरू होते हैं।