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जीएसटी लागू होने से बढ़ सकते हैं डेढ़ से दो हजार व्यापारी

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मऊ। गुड्स सर्विसेज टैक्स जीएसटी को लेकर अभी व्यापारियों और आम जनमानस में ऊहापोह की स्थिति है। एक महीना गुजरने के बाद हालांकि अभी व्यापारियों की परेशानी कम नहीं हुई है लेकिन विभाग में पंजीयन को लेेकर संख्या पूर्व की अपेक्षा बढ़ रही है। पूर्व में जिले में टीन नंबर लेने वाले 6000 व्यापारी थे। जीएसटी लागू होने के बाद पूर्व के व्यापारियों के अलावा 300 और संख्या व्यापारियों की बढ़ी है।
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एक जुलाई से लागू जीएसटी को लेकर अभी भी व्यापारियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। व्यापरियों का कहना है कि उन्हें जगह-जगह डाटा फीडिंग से लेकर रिटर्न दाखिल आदि के झमेलों को लेकर दिक्कतें हो रही हैं। जब कि विभाग का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों की समस्या कम होगी। अधिकांश छोटे व्यापारियों को जीएसटी के झमेले से हमेशा के लिए छूट मिल जाएगी। बड़े व्यापारी जो बड़े कारोबारियों या सीधे कंपनी आदि से माल खरीदते थे उन्हें कुछ समस्या आ रही है लेकिन वह भी समय रहते दूर हो जाएगी। जिले में व्यापारियों की संख्या पूर्व में 6000 थी। विभाग का मानना है कि पूर्व के सभी व्यापारियों ने तो अपना जीएसटी नंबर लगभग ले ही लिया है। इसके अलावा भी लगभग 300 नए व्यापारियों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है ताकि वह अपना कारोबार जीएसटी के तहत कर सकें।
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क्या कहते हैं व्यापारी
मऊ। जीएसटी को लेकर व्यापारियों में नई व्यवस्था के लागू होने के चलते काम के प्रभावित होने के चलते ज्यादा दिक्कत आ रही है। व्यापारियों का कहना है कि पिछले एक महीने से काम आधे से अधिक ठप जैसा है। अब जाकर किसी प्रकार बीलिंग आदि का काम शुरू हो पाया है। मार्केट में माल मंगाने में अभी आधी सहूलियत नहीं हो पाई है।
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किराना व्यवसायी संतोष जायसवाल का कहना है कि बड़े व्यापारियों से माल खरीदने में अभी जीएसटी नंबर आदि की दिक्कतें आ रही हैं। वहीं छोटे व्यापारी भी ऊहापोह में हो जा रहे हैं। राकेश गर्ग कहते हैं कि नई व्यवस्था लागू तो हो गई लेकिन जीएसटी पूरी तैयारी के बिना ही थोप दी गई। इससे एक महीने से कारोबार प्रभावित है। जितेंद्र राखोलिया का का कहना है कि कपड़े पर जीएसटी को लेकन सरकार कुछ नरम हुई है लेकिन अभी कारोबार के पटरी पर आने में काफी वक्त लग सकता है। साजिद अनवर का कहना है कि अभी कारोबारियों को तरह-तरह की समस्याओं से दो चार होना पड़ रहा है। व्यापार पटरी में आने में अभी भी काफी वक्त लग सकता है।
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छोटे व्यापारी कत्तई न हो परेशान
मऊ। डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर एके बनर्जी का कहना है कि नई व्यवस्था के चलते सर्वर में अभी कुछ समस्या आ रही है लेकिन इसे जल्द ही दूर कर लिया जाएगा। व्यापारियों की संख्या में वृद्धि डेढ़ से दो हजार की संभव है। छोटे व्यापारियों को कत्तई भी घबराने की जरुरत नहीं है। कहा कि जिनका भी महीने का 20 लाख से कम का टर्नओवर है उनके लिए जीएसटी अनिवार्य नहीं है। अगर वह बड़े व्यापारियों से माल खरीदते हैं तो भी उन्हें कोई समस्या नहीं है लेकिन अब बड़े व्यापारियों को माल बेचते हैं तो उन्हें जीएसटी नंबर लेने की जरुरत पड़ेगी लेकिन उन्हें तब भी टैक्स नहीं देना पड़ेगा।
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