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इस बार भी लौट न जाए शादी अनुदान की धनराशि

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मऊ। शासन द्वारा गरीब अभिभावकों की पुत्रियों के लिए चलाई जाने वाली शादी अनुदान योजना के तहत आनलाइन आवेदनों को सत्यापित करने में सक्षम अधिकारियों की ओर से लेटलतीफी की जा रही है। अफसरों की लापरवाही के चलते ही पिछले वित्तीय वर्ष में केवल ओबीसी वर्ग के लिए मिले धन में से 40 लाख रुपये वापस करने पड़े और लाभार्थियों को निराशा झेलनी पड़ी।
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चालू वित्तीय वर्ष के ढाई महीने बीत जाने के बाद अब तक 375 आवेदन आ गए हैं जबकि सत्यापन अधिकारियों की ओर से अब तक महज 17 आवेदनों की सत्यापन रिपोर्ट जनपद मुख्यालय को भेजी जा सकी है। इन लंबित आवेदनों में जो अप्रैल के प्रथम सप्ताह में आनलाइन किए गए होंगे, उनके निरस्त होने का खतरा उत्पन्न हो गया है क्यों कि 75 दिन की अवधि पूरी होते ही ऐसे आवेदन निरस्त हो जाएंगे। अफसरों की इस सुस्ती को लेकर अभिभावकों में चिंता है। समाजसेवी अरविंद मूर्ति, किसान नेता देवप्रकाश राय, देवेंद्र सिंह, अध्यापक बबलू उपाध्याय, कर्मचारी नेता रामाश्रय यादव और अध्यापिका रीता यादव का कहना है कि उच्चाधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लाभार्थियों को योजना का लाभ देने के लिए अधिकारी समय पर अपनी सत्यापन रिपोर्ट भेजें। इन लोगों का मानना है कि यदि जिस अफसर की लापरवाही से योजना का लाभ पाने से जितने पात्र वंचित रह जाते हैं, उन अफसरों के वेतन से उतनी रकम की कटौती करके लाभार्थियों की दी जाए। उन्होंने कहा कि सत्यापन अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
प्रमुख सचिव ने जताई है चिंता
जनपद में शादी अनुदान योजना के आनलाइन आवेदनों के सत्यापन की गति धीमी रफ्तार पर प्रमुख सचिव मनोज सिंह ने चिंता जाहिर किया है। उन्होंने कहा है कि जिन अधिकारियों के द्वारा सत्यापन रिपोर्ट में देरी के चलते लाभार्थी योजना के लाभ से वंचित रह जाएंगे। उनकी रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
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क्या है आवेदन की प्रक्रिया
योजना के तहत शहर क्षेत्र के 58 हजार रुपये वार्षिक आय से नीचे वाले तथा ग्रामीण क्षेत्र में 48 हजार रुपये सालाना आय वाले अभिभावकों की दो पुत्रियों की शादी के लिए सरकार बीस बीस हजार रुपये अनुदान देती है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में शादी से तीन माह पूर्व अथवा तीन महीने बाद तक ही इस योजना के लिए आवेदन किया जा सकता है। आवेदन के बाद ग्रामीण क्षेत्र के आवेदनों के सत्यापन बीडीओ को और शहरी क्षेत्रों के आवेदनों के सत्यापन का दायित्व उपजिलाधिकारी को दिया गया है। इसके लिए 21 दिन की समय सीमा तय की गई है। गाइड लाइन के अनुसार 75 दिन बीत जाने के बाद आवेदन स्वत: निरस्त हो जाएगा। इसके लिए पुन: निदेशक समाज कल्याण से संस्तुति लेनी पड़ती है।

-सत्यापन अधिकारियों को समय से सत्यापन रिपोर्ट भेजने के लिए पत्र भेजे गए हैं। इस बाबत जिलाधिकारी गंभीर रुख अपनाए हैं। डीएम की तरफ से भी खंड विकास विकास अधिकारियों और उपजिलाधिकारियों को पत्र भेजकर सत्यापन रिपोर्ट अधिकतम 21 दिनों के अंदर समाज कल्याण अधिकारी को भेजने के निर्देेेश दिए हैं। अभिभावकों को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए और अफसरों से मिलकर सत्यापन रिपोर्ट समय से भेजवाने का प्रयास करना चाहिए। इससे उन्हें योजना का लाभ पाने में मदद मिलेगी।
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-विजय प्रताप यादव, प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी, मऊ
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