मऊ। एक ब्लाक को छोड़कर जिले के आठ ब्लाकों के 155 गांवों में पहले लाक डाउन के दौरान मनरेगा में अनियमितता की पोल सोशल आडिट में खुल गई है। आडिट में सिर्फ एक वित्तीय वर्ष 2019-20 में 3.97 करोड़ के गबन की पुष्टि हुई है। पोल खुलने पर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। अब संबंधित ग्राम पंचायतों से रिकवरी की कवायद की जा रही है। इसके लिए खंड विकास अधिकारियों ने ग्राम सचिवों को नोटिस जारी किया है। संबंधित रकम न जमा करने पर सचिवों के वेतन से प्रतिमाह कटौती करने की तैयारी है। धनराशि जमा नहीं करने पर जिला प्रशासन भू-राजस्व की भांति वसूली करेगा। ग्राम पंचायतों से वसूली गई धनराशि जिला मुख्यालय पर मनरेगा प्रशासनिक मद में जमा कराई जाएगी। गरीबों को रोजगार देने की गारंटी वाली योजना मनरेगा में सोशल आडिट की टीम ने बड़ी वित्तीय अनियमितता का खुलासा किया है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में जमकर अनियमितता का दौर चला और मनरेगा के 60:40 रेशियो के तहत कच्चे-पक्के कामों पर जमकर रुपये खर्च किए गए।घोसी ब्लाक को छोड़ सभी आठ ब्लाकों में सोशल हुई तो इसमें 3.97 करोड़ रुपये का गबन पाया गया। इसमें अकेले केवल रतनपुरा ब्लाक में सर्वाधिक1.39 करोड़ की अनियमितता मिली है। सोशल आडिट की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019-20 में मनरेगा मद में कुल 115.27 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें श्रम मद में 82.71 करोड़ तो सामग्री मद में 32.56 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। साथ ही अगले वित्तीय वर्ष यानी 2020-21 में भी लाकडाउन के दौरान श्रम मद में कम तो सामग्री मद में 32 करोड़ रुपये भुगतान कर दिए गए। मुख्य विकास अधिकारी रामसिंह वर्मा ने बताया कि सोशल आडिट के दौरान जिन ग्राम पंचायतों में बिना काम कराए भुगतान किए जाने की जानकारी मिली है। इसके संबंधित तत्कालीन सेक्रेटरी, ग्राम प्रधान, तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक से संबंधित रकम की वसूली कराई जाएगी। इसके लिए सभी खंड विकास अधिकारियों को रिकवरी कराने के निर्देश दिए गए हैं।